
देश के लिए जीना स्वयंसेवक का ध्येय: मोहन भागवत
नागपुर- 12 जनवरी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि हमारे गुण और कार्य का प्रयोग आत्मसंतुष्टि के लिए नहीं होना चाहिए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में आने वाले स्वयंसेवक अपने लिए नहीं बल्कि देश और समाज के लिए जीते हैं और यही उनका ध्येय है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नागपुर महानगर की ओर से स्वामी विवेकानंद कि जयंती के अवसर पर स्थानीय यशवंत स्टेडियम में ‘नवोन्मेष’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बाल स्वयंसेवकों ने अलग-अलग कर्तब और घोष का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर स्वयंसेवकों को पाथेय प्रदान करते हुए सरसंघचालक ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भगवा ध्वज को आदर्श माना जाता है लेकिन बालकों के लिए प्रतीकों को आदर्श मानकर कार्य करना कठिन होता है। नतीजनत रामभक्त हनुमान, छत्रपति शिवाजी महाराज और स्वामी विवेकानंद को आदर्श मानकर संघ में आने वाले स्वयंसेवकों को कार्य की प्रेरणा दी जाती है।
डॉ. भागवत ने बताया कि हनुमान में धैर्य, दृष्टि, गति और मति यह 4 विशेष गुण थे। संघ में इन गुणों के विकास पर ध्यान दिया जाता है। बतौर सरसंघचालक देश को विश्वगुरू बनाना हमारा लक्ष्य है इसके लिए निज स्वार्थ का त्याग कर देश और समाज के लिए जीना यह हमारा ध्येय है। सरसंघचालक ने वीर सावरकर के जीवन दर्शन के सुस्पष्ट करने वाली उनकी कविता कि पक्तियों का स्मरण कर बाताया कि मातृभूमि के काम न आने वाली शक्ति और बुद्धि व्यर्थ भार की तरह होती है। डॉ. भागवत ने आह्वान किया कि ऊंचे आदर्श बाल स्वयंसेवकों के सामने रखे जाएं तो आने वाली पिढ़ियां अपने कार्य को आज की अपेक्षा सौ गुना अधिक ऊंचाई पर ले जाएगी।



