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दुनिया भर की शीर्ष खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों की सिंगापुर में हुई गोपनीय बैठक

सिंगापुर- 04 जून। सिंगापुर में दुनिया भर की शीर्ष खुफिया एजेंसियों की शांगरी-ला डायलॉग सुरक्षा बैठक हुई, जिसमें लगभग दो दर्जन वरिष्ठ अधिकारियों ने एक गुप्त बैठक की। इसमें भारत की तरफ से रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुख सामंत गोयल ने भी इस बैठक में भाग लिया।

रिपोर्ट के अनुसार कहा कि इस तरह की बैठकें सिंगापुर सरकार की ओर से कई वर्षों से सुरक्षा शिखर सम्मेलन के साथ एक अलग स्थान पर आयोजित की जाती रही हैं। साथ ही इन बैठकों की सूचना पहले नहीं दी जाती है।

अमेरिका का प्रतिनिधित्व उसके देश के खुफिया समुदाय के प्रमुख, नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक एवरिल हाइन्स ने किया। एक भारतीय सूत्र ने कहा कि भारत की विदेशी खुफिया जानकारी एकत्र करने वाली एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के प्रमुख सामंत गोयल ने भी इस बैठक में भाग लिया।

बैठक से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि यह बैठक अंतरराष्ट्रीय शैडो एजेंडा पर थी। इसमें शामिल देशों की श्रेणी को देखते हुए यह ट्रेडक्राफ्ट का त्योहार नहीं है, बल्कि इरादों और गहरी समझ को बढ़ावा देने का एक तरीका है। खुफिया सेवाओं के बीच एक अनकहा कोड है कि जब अधिक औपचारिक और खुली कूटनीति कठिन होती है, तो वे गुप्त तरीके से बात कर सकते हैं, इसलिए सिंगापुर में यह बैठक आयोजित की जाती है।मामले की संवेदनशीलता के कारण बैठकों पर चर्चा करने वाले सभी पांच स्रोतों की पहचान करने से मना कर दिया गया। इसमें शामिल होने वाले लोगों के लिए यह बैठक लाभकारी साबित होती है।

कभी-कभी होती हैं खुफिया एजेंसियों की बैठके—

सिंगापुर में अमेरिकी दूतावास ने कहा कि उसे बैठक के बारे में कोई जानकारी नहीं है। चीनी और भारतीय सरकारों ने टिप्पणी के अनुरोधों का तुरंत जवाब नहीं दिया। संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और साझा करने के लिए फाइव आईज नेटवर्क को संचालित करते हैं। सूत्रों में से एक ने कहा कि कोई रूसी प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। यूक्रेन के उप रक्षा मंत्री, वलोडिम्र वी. हैवरीलोव शांगरी-ला इस वार्ता में थे, लेकिन उन्होंने कहा कि वह खुफिया बैठक में शामिल नहीं हुए।

शांगरी-ला डायलॉग सुरक्षा की बैठक में 49 देशों के 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। उन्होंने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें कीं। ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री एंथनी अल्बनीस ने मुख्य भाषण दिया, जबकि अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन, चीनी रक्षा मंत्री ली शांगफू और ब्रिटेन के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे। जापान, कनाडा, इंडोनेशिया और दक्षिण कोरिया भी इसमें शामिल थे।

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