
जुवनाइल कोर्ट ने किशोर को सुनाई तीन माह तक मिडिल स्कूल में पढ़ाने की सजा
पटना/गोपालगंज- 22 फरवरी। बिहार के गोपालगंज किशोर न्याय परिषद के प्रधान मजिस्ट्रेट राकेश मणि तिवारी ने बरौली थाना क्षेत्र निवासी इंटरमीडिएट के छात्र को मारपीट, छेड़खानी और डायन एक्ट के मामले में दोषी पाते हुए मिडिल स्कूल में तीन माह तक छात्र-छात्राओं को पढ़ाने की सजा सुनाई है।
जिला किशोर न्यायालय के प्रधान मजिस्ट्रेट राकेश मणि तिवारी और सदस्य ममता श्रीवास्तव ने यह कार्य स्कूल के प्राचार्य के पर्यवेक्षण में करने को कहा। साथ ही प्रिंसिपल को तीन माह बाद अपनी रिपोर्ट देंगे। इससे यह स्पष्ट होगा कि कोर्ट के आदेश का अनुपालन हुआ या नहीं।
प्रधान मजिस्ट्रेट ने कहा कि किशोर का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था। पूछताछ में उसके यह कहने पर कि बड़ा होकर वह वैज्ञानिक बनना चाहता है और कोर्ट की तरफ से पढ़ाई के बारे में की गई सामान्य पूछताछ में सभी प्रश्नों के सही एवं स्पष्ट जवाब दिया है। किशोर की बातों से प्रभावित होकर न्यायालय ने कोई अन्य सजा देने की बजाय उसके हुनर और प्रतिभा को देखते हुए पास के मिडिल स्कूल में पढ़ाने की सजा दी है।
प्रधान मजिस्ट्रेट और किशोर के बीच हुए सवाल-जवाब
1. प्रधान मजिस्ट्रेट- पौधे किस विधि से भोजन का निर्माण करते हैं ?
किशोर- सर प्रकाश संश्लेषण विधि द्वारा पौधे भोजन का निर्माण करते हैं।
2. प्रधान मजिस्ट्रेट- पसीना निकलने से शरीर का सबसे उपयोग कार्य क्या होता है ?
किशोर- सर शरीर से पसीना निकलने पर शरीर का ताप नियन्त्रित होता है।
3. प्रधान मजिस्ट्रेट -प्रकृति में सबसे सशक्त बल क्या होता है?
किशोर – सर नाभिकीय बल प्रकृति में सबसे सशक्त बल होता है।
4. प्रधान मजिस्ट्रेट- यदि किसी स्थान के तापमान में सहसा वृद्धि हो तो आपेक्षिक आर्द्रता घटती है कि बढ़ती है।
किशोर -घटती है
इसके अलावा न्यूटन के थ्योरी समेत मैथ के फॉर्मूले पूछने पर सही और सटीक जवाब दिया। प्रधान मजिस्ट्रेट ने उसके द्वारा दिये गए बेबाकी से सटीक जवाब सुन कर पूछा कि क्या बनना चाहते हो? तो उसने कहा कि मैं वैज्ञानिक बनना चाहता हूं। इसके बाद प्रधान मजिस्ट्रेट व बोर्ड के सदस्य उसके जवाब से संतुष्ट होकर एवं प्रभावित हुए। उसकी प्रतिभा जानकारी को ध्यान में रखते हुए जेजे एक्ट 2015 के धारा 18 के अंतर्गत कोई अन्य सजा देने की बजाए अपने क्षेत्र के मिडिल स्कूल में तीन माह तक छात्र-छात्राओं को पढ़ाने का आदेश दिया।
उल्लेखनीय है कि इसके पहले भी प्रधान मजिस्ट्रेट ने कई अनोखे फैसले सुनाए हैं। प्रधान मजिस्ट्रेट ने फरवरी 2021 से अब तक कुल 100 मामलों में सजा सुनाई है। इनमें आठ किशोरों को मंदिर की सफाई, चार को मस्जिद की सफाई के अलावा निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने की सजा सुनाई है। वहीं, पांच अन्य को पेड़ लगा कर उसका तीन माह तक देखभाल करने की अनोखी सजा सुनाई है। हर किशोर को 25-25 पेड़ लगाने को कहा गया है। किशोर वन विभाग से पौधे लेकर लगाते हैं।



