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जल्द ही रूसी एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम से फायरिंग ट्रायल करेगी वायु सेना

नई दिल्ली- 04 अप्रैल। भारतीय वायुसेना जल्द ही रूसी एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम का पहला फायरिंग ट्रायल करने जा रही है। यह परीक्षण छोटी और मध्यम दूरी की दोनों मिसाइलों का उपयोग करके तेजी से आगे बढ़ने वाले हवाई लक्ष्य के खिलाफ किया जाएगा। यूक्रेन से युद्ध के बीच रूस अब तक भारत को 3 एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति कर चुका है, जबकि दो सिस्टम अभी मिलने बाकी हैं। रूस से मिली दो एस-400 स्क्वाड्रन को देश की उत्तरी और पूर्वी इलाकों में तैनात किया जा चुका है।

भारत और रूस के बीच हुए पांच स्क्वाड्रन एस-400 मिसाइल सिस्टम का यह सौदा 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक का है। भारत के रक्षा बेड़े में शामिल हो रहे इस रूसी मिसाइल डिफेन्स सिस्टम से पूरी दुनिया खौफ खाती है। यह प्रणाली अपनी मिसाइलों से दुश्मन की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों, लड़ाकू विमानों को 400 किमी. की दूरी तक तबाह कर सकती है। यह मिसाइल जमीन से 100 फीट ऊपर उड़ रहे खतरे की पहचान करके हमला करने में सक्षम है। भारत को रूस अब तक तीन एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति कर चुका है। रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम मिलने के बाद विरोधी सतर्क हो गए हैं, क्योंकि वे इस रूसी मिसाइल प्रणाली की बेहतर क्षमताओं से अवगत हैं।

भारतीय वायु सेना लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली की पहली दो स्क्वाड्रन चालू कर चुकी है। उत्तरी-पूर्वी सीमा पर तैनात एस-400 चीन सीमा के लद्दाख सेक्टर के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के नाजुक चिकन नेक कॉरिडोर को कवर कर सकती है। दूसरी स्क्वाड्रन को पंजाब में इस तरह से तैनात किया गया है कि वे पाकिस्तान की सीमा के साथ-साथ उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में भी देखरेख कर सके। भारतीय बलों ने आपूर्ति से पहले रूस में परीक्षण के दौरान एस-400 मिसाइल प्रणाली को दागा था, लेकिन अभी देश में इसका ट्रायल किया जाना बाकी है। वायु सेना अब जल्द ही मिसाइल डिफेंस सिस्टम का पहला फायरिंग ट्रायल करने जा रही है।

वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने बताया कि छोटी और मध्यम दूरी की दोनों मिसाइलों का उपयोग करके तेजी से आगे बढ़ने वाले हवाई लक्ष्य के खिलाफ बहुत जल्द फायरिंग की योजना बनाई गई है। इस वायु रक्षा प्रणाली में मिसाइलों की एक अलग रेंज है, जो तेजी से लक्ष्य को मार गिरा सकती है। लड़ाकू विमानों या क्रूज मिसाइलों को 400 किलोमीटर की अधिकतम सीमा तक ले जाया जा सकता है। यह प्रणाली दुश्मन के लड़ाकू विमानों, मानव रहित हवाई वाहनों, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों और क्रूज मिसाइलों को 400 किलोमीटर तक मार सकती है। एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम चार अलग-अलग मिसाइलों से लैस है।

भारत और रूस ने एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की पांच स्क्वाड्रन के लिए 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के सौदे पर हस्ताक्षर किए थे। बाकी दो सिस्टम की आपूर्ति 2023-24 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। भारतीय वायु सेना का मानना है कि एस-400 भारत की सीमाओं की रक्षा के लिए गेम चेंजर साबित होगी। हर फ्लाइट में आठ लॉन्चर हैं और हर लॉन्चर में दो मिसाइल हैं। चीन और पाकिस्तान के खतरे को देखते हुए भारत को रूस में बने इस ताकतवर एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 की बहुत जरूरत थी। यह एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल आवाज की गति से भी तेज रफ्तार से हमला बोल सकती है।

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