
केन्द्रीय बजट में अल्पसंख्यक समुदाय को उचित हिस्सा नहीं मिलने पर पुर्व मंत्री के. रहमान ने जताई चिंता
नई दिल्ली- 02 फरवरी। केंद्रीय बजट में अल्पसंख्यक समुदाय को उचित हिस्सा न देने पर जिंता जताई गई है। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का कहना है कि केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के जरिए बजट में वृद्धि किए जाने की बात की जा रही है मगर जो बजट अल्पसंख्यकों के लिए दिया गया है उसमें किसी भी तरह की नई स्कीम और योजना आदि लागू करने की बात नहीं कही गई है। बल्कि मौलाना आजाद फाउंडेशन और मदरसों के आधुनिकीकरण के बजट में कटौती कर दी गई है।
केंद्रीय बजट में अल्पसंख्यकों के लिए 2022- 23 के लिए 50 20 .50 का बजट बजट रखा गया है। हालांकि यह बजट पिछले साल की तुलना में 200 करोड़ ज्यादा है। जबकि 2020-21 के तुलना में 10 करोड़ रुपये कम है। पिछड़ी जातियों और एससी एसटी के बजट में 13 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के बजट में 11 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। जबकि अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में महज 4 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
पूर्व केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री के रहमान खान ने कहा है कि कल संसद में पेश बजट में कोई वृद्धि नहीं हुई है। उनका कहना है कि बजट में वृद्धि एस्टीमेट बजट में देखी जाती है। स्कीमें सारी महंगी हो चुकी हैं ।स्कूलों की फीस बढ़ गई है,स्टेशनरी वगैरह के दामों में वृद्धि होती जा रही है लेकिन अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है। खान का कहना है कि बजट बनाते वक्त हर साल 10 प्रतिशत महंगाई का इजाफा किया जाता है अगर सालाना 10 प्रतिशत का इजाफा हर साल किया जाता तो अब तक मोदी सरकार के 6-7 सालों में अल्पसंख्यक मंत्रालय का बजट आठ हजार करोड़ हो जाता। लेकिन अभी तक मंत्रालय का बजट 5000 करोड़ रुपये के आसपास ही घूम रहा है।
बजट पर काम करने वाले विशेषज्ञ जावेद आलम खान का कहना है कि बड़ी अजीब बात है कि जब पिछड़ेपन की बुनियाद पर बजट बनाया जाता है तो सभी तरह के पिछड़ापन झेलने वालों के लिए एक जैसा उसूल क्यों नहीं बनाया जाता है। एक के लिए बजट में दाल में नमक के बराबर वृद्धि होती है जबकि दूसरे को नवाज दिया जाता है।उन्होंने बताया कि स्किल डेवलपमेंट और महिला सशक्तिकरण वाली स्कीमों के फंड में पिछले सालों की तुलना में इस साल कटौती की गई है।
मौलाना आजाद नेशनल एजुकेशनल फाउंडेशन के कोषाध्यक्ष शाकिर अंसारी का कहना है कि बजट काफी सोच समझकर बनाया गया है। अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में वृद्धि की गई है जिसकी वजह से अल्पसंख्यक समुदाय के विकास और उत्थान के लिए काफी काम करने का अवसर मिलेगा। बजट में वृद्धि होने से अल्पसंख्यकों को इसका फायदा पहुंचेगा।



