
केंद्र सरकार ने उर्दू के विकास के लिए कौंसिल का बजट डेढ़ सौ गुना तक बढ़ाया: प्रो. शेख अकील अहमद
लखनऊ/दिल्ली- 22 दिसंबर। लखनऊ के साहित्य एवं संस्कृति की चर्चा सारी दुनिया में रही है। यहां के नवाबों ने अन्य कलाओं के अतिरिक्त साहित्य एवं संस्कृति को बहुत बढ़ावा दिया जिसके कारण यहां के आमजन कला और संस्कृति में रचे-बसे हैं। इसका असर उनके रहन-सहन, खान-पान आदि में बखूबी झलकता है।
उक्त बातें आज राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (एनसीपीयूएल) के निदेशक प्रो. शेख अकील अहमद ने उप्र उर्दू अकादमी और राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय साहित्यिक सम्मेलन में स्थानीय उर्दू अकादमी प्रेक्षागृह में कहीं। उन्होंने कहा कि कौंसिल और अकादमी का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और उर्दू भाषा तथा साहित्य को बढ़ावा देना है। प्रो. अकील अहमद ने बताया कि केंद्र सरकार ने कौंसिल के बजट को 150 प्रतिशत तक बढ़ाया है।
साहित्यिक सम्मेलन में खलील उर्रहमान एडवोकेट ने साहित्य और संस्कृति विषय पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शब्द केवल माध्यम होता है। शब्द के माध्यम से उसका अर्थ पाठक के मस्तिष्क तक पहुंचता है। उन्होंने इस अवसर पर उर्दू, हिंदी, अंग्रेज़ी, फारसी और संस्कृत के साहित्य से उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने लखनऊ के ख्याति प्राप्त शायर मीर अनीस का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कर्बला की घटना में जिस प्रकार भारतीय परम्पराओं का उल्लेख किया है, वह देखते ही बनता है।
सम्मेलन की अध्यक्षता उ.प्र. उर्दू अकादमी के चेयरमैन चौधरी कैफ़ुल वरा ने की। अकादमी के सचिव ज़ुहैर बिन सगीर, डॉ. माहे तलत, डॉ. रिज़वाना, संजय मिश्रा शौक व डॉ. अकबर अली उपस्थित रहे। सम्मेलन के दूसरे सत्र में तमसीली मुशायरे और चहार बैत का कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।



