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ऑपरेशन गंगाः यूक्रेन से भारत की आखिरी निकासी उड़ान गुरुवार को

कीव- 09 मार्च। युद्धग्रस्त यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए शुरू किया गया भारत सरकार का ‘ऑपरेशन गंगा’ अभियान गुरुवार को पूरा हो जाएगा। गुरुवार शाम यूक्रेन से उड़ान भरने वाली भारत की आखिरी फ्लाइट होगी। विशेष रूप से निकासी के लिए भेजी गई सरकारी टीमें भी स्वदेश लौट आएंगी।

रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर आक्रमण किया था। इसके बाद भारत सरकार ने 26 फरवरी को ‘ऑपरेशन गंगा’ शुरू किया। इस अभियान के तहत अब तक लगभग 18 हजार भारतीय नागरिकों को वहां से निकाला गया है। इनमें से अधिकांश विद्यार्थी हैं। विद्यार्थियों के अंतिम जत्थे के रूप में रूसी सीमा के पास सूमी में फंसे लगभग 700 विद्यार्थी ट्रेन से पश्चिमी यूक्रेन के रास्ते में हैं। वह स्वदेश के लिए गुरुवार को उड़ान भरेंगे।

यूक्रेन के सूमी से निकाले गए भारतीय विद्यार्थियों को बुधवार को एक विशेष ट्रेन में सवार कर दूतावास ने तस्वीरें ट्वीट की हैं। इनमें विद्यार्थी खुश दिख रहे हैं। इन तस्वीरों को देखकर तनावग्रस्त परिवारों को उनके घर वापस आने की उम्मीद बंधी है। अंतिम बड़े समूह में शामिल लगभग 600 भारतीय और अन्य देशों के 17 लोग यूक्रेन के पोल्टावा से ट्रेन में सवार हुए हैं। इनके गुरुवार को पोलैंड से स्वदेश वापसी के लिए उड़ान पकड़ने की संभावना है।

छात्र समन्वयक अंशद अली ने बताया कि ट्रेन विद्यार्थियों को पश्चिमी यूक्रेन के लविवि ले जाएगी। वहां से उन्हें बसों से पोलैंड ले जाया जाएगा। पोल्टावा और लविवि के बीच की दूरी लगभग 888 किलोमीटर है। सूमी से निकाले गए समूह में 580 विद्यार्थी, वर्क परमिट पर गए 20 भारतीय और उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं। 600 भारतीयों के साथ निकाले गए लोगों में बांग्लादेश के 13, नेपाल और पाकिस्तान से एक-एक और ट्यूनीशिया के दो नागरिक भी हैं।

नागरिकों को निकालने के लिए शहर से पोल्टावा तक मानवीय गलियारे की स्थापना के बाद ही 12 बसें निकलीं। रेडक्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति, यूक्रेनी अधिकारियों और भारतीय दूतावास के अधिकारियों की सुरक्षा में संघर्ष क्षेत्र के बजाय सुरक्षित मार्ग से 12 बसों के काफिले में भारतीय नागरिकों को मंगलवार सुबह सूमी से पोल्टावा शहर ले जाया गया। यहां भारतीय अधिकारियों को समन्वय के लिए पिछले कुछ दिनों से तैनात किया गया था।

भारतीयों के साथ सुरक्षित निकाली गईं पाकिस्तान की अस्मा शफीक ने मदद के लिए भारतीय अधिकारियों का आभार जताया है। नेपाल के रोशन झा भी युद्धक्षेत्र से जीवित निकल पाने पर खुश हैं। उन्होंने भी भारत का आभार जताया है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बांग्लादेश के नागरिकों की मदद करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया है।

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