भारत

‘उदयपुर फाइल्स’ फिल्म पर तीन दिन में लग गई रोक

उदयपुर- 11 जुलाई। राजस्थान के उदयपुर में तीन साल पहले हुई टेलर कन्हैयालाल हत्याकांड पर हाल ही में बनी फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ पर दिल्ली उच्च न्यायालय की रोक के बाद तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कन्हैयालाल के बेटे यश के साथ ही विश्व हिन्दू परिषद ने अदालत के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है।

कन्हैयालाल के बेटे यश ने कहा कि फिल्म के खिलाफ जो याचिका लगी है, वह शायद तीन या चार दिन पहले लगी थी। लेकिन एक याचिका जो मैंने पिताजी के घटना के समय आज से करीब तीन साल पहले लगाई थी, उस केस का कोई निष्कर्ष नहीं निकला। आज तक वह केस जैसे का तैसा ही है। उस केस में डेढ़ सौ से अधिक गवाह थे। उसमें शायद 15 या 16 की पेशियां भी नहीं हुईं। न उसमें फास्ट ट्रैक लगा। उसमें सीबीआई को एनआईए का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। केस वहीं पर चल रहा है। वहां रोजाना सुनवाई भी नहीं होती है। मेरी उसमें बराबर पेशी हो रही है। वहीं सबूत वगैरह सब कुछ होने के बावजूद तीन साल से इस केस में किसी भी अपराधी को सजा नहीं मिली।

यश ने कहा कि जब कोई फिल्म के जरिए देश को हकीकत दिखाना चाहता है, तो इसके लिए पूरा संगठन खड़ा हो जाता है। जमात-ए-हिंद, मौलाना मदनी आ जाते हैं कि नहीं, इस फिल्म पर रोक लगनी चाहिए। और सिर्फ तीन दिन के अंदर हमें पता चल रहा है कि फिल्म पर रोक भी लग गई। यह योजना कितनी तेज है! वहीं जब किसी केस में अपराधियों को सजा देनी होती है, तो वह नहीं हो रही है। यह गंभीरता से सोचने वाली बात है।

उसने कहा कि हमारे देश में जो चीज हो रही है, वह नहीं होनी चाहिए थी। उस समय मेरे पिताजी को किस तरह से मार दिया गया। उसके बाद उन्हें अभी तक न्याय नहीं मिला। इसके बाद एक फिल्म आ रही है जो पूरे देश को दिखाने के लिए कि किस तरह से, किस सोच के ज़रिए, आतंकवादी विचारधारा के तहत पाकिस्तानियों से जुड़ाव के साथ मेरे पिताजी को मार दिया गया था। इस फिल्म में भी वही सब कुछ दिखाया गया है कि किस तरह से आतंकवादियों ने साजिश करके मेरे पिताजी को मारा। इसी के विरोध में एक संगठन खड़ा हो जाता है। पता नहीं उनको आतंकवादियों से क्या सहानुभूति है?

विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा-“उदयपुर में कन्हैयालाल के हत्यारों के विरुद्ध एनआईए ने 6 माह में ही चार्जशीट दाखिल कर दी थी। किंतु, दुर्भाग्य से मानवता के उन शत्रुओं को 3 वर्षों में भी फांसी नहीं दी जा सकी। वहीं दूसरी ओर, उदयपुर_फाइल्स पर मात्र 3 घंटे में, बिना फिल्म देखे, उच्च न्यायालय का स्थगन आदेश आना तथा उस ऑर्डर की कॉपी, सम्बंधित पक्षकारों को 21 घंटे बाद भी अभी तक ना मिल पाना, बहुत कुछ कहता है? क्या मौखिक आदेश ही सब कुछ है!! कोई तो बताए कि उस फिल्म में आखिर गलत क्या है? क्या हत्या नहीं हुई”?

बंसल ने कहा कि कन्हैयालाल के बेटे को न्याय न दिला कर क्या कभी उसके लम्बे केश कट पायेंगे और उसके नंगे पैरों को क्या कभी पद वेश मिल पाएंगे। क्या कभी हत्यारों को फांसी होगी? न्याय की आस में कन्हैयालाल की अस्थियां भी क्या कभी विसर्जित हो पाएंगी!!

फिल्म पर रोक के मामले में मेवाड़ के पूर्व राजघराने के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि वह आतंक, इंसानियत और देश के खिलाफ जैसे कृत्यों की हमेशा निंदा करते हैं। जहां तक न्यायिक प्रक्रिया का मामला है, न्यायपालिका सर्वोपरि है।

उल्लेखनीय है कि चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड पर आधारित फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस अनीश दयाल की बेंच ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी सहित तीन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि यह फिल्म देश के मुसलमानों को बदनाम करती है और इससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को दो दिन के भीतर अपनी आपत्ति केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही केंद्र सरकार को सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की धारा 6 के तहत एक सप्ताह में फैसला लेने को कहा गया है। तब तक फिल्म की रिलीज पर रोक जारी रहेगी। उच्चतम न्यायालय पहले ही फिल्म पर रोक लगाने से इनकार कर चुका है, लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब इसकी रिलीज़ अटक गई है।

गौरतलब है कि 28 जून 2022 को कन्हैयालाल की उनके ही दुकान में गला काटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में एनआईए ने 11 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी, जिसमें दो को अब तक जमानत मिल चुकी है।

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