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आंतकवादी हमले में मारे गए दिनेश मिरानिया की पत्नी और बच्चों से मिलकर अमित शाह ने दी सांत्वना

रायपुर- 23 अप्रैल। जम्मू-कश्मीर में हुए आंतकी हमले में छत्तीसगढ़ के कई लोग वहां फंसे हुए हैं। चिरमिरी, बिलासपुर के कई नागरिक परिवार समेत श्रीनगर और पुलवामा क्षेत्र में रुके हुए हैं। सुरक्षा बल के जवानों ने सभी को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया। चिरमिरी से शिवांश जैन, लक्की पराशर, हैप्पी बडवान, कुलदीप, अरविंद अग्रवाल फंसे हैं और बिलासपुर के दो परिवार के लोग वहां हैं । उधर कश्मीर में मृतक दिनेश मिरानिया की पत्नी नेहा और बच्चों शौर्य, लक्षिता से गृह मंत्री अमित शाह ने मिलकर सांत्वना दी और कहा कि हमले में अपनों को खोने का दर्द हर भारतीय को है। आतंकियों को बक्शा नहीं जाएगा।

उल्लेखनीय है कि रायपुर के समता कॉलोनी निवासी कारोबारी दिनेश मिरानिया को आतंकवादियों ने मंगलवार पहलगाम के पर्यटक स्थल बैसरन घाटी पर गोली मार कर हत्या कर दी। उसी दिन उनकी शादी की सालगिरह थी। वह परिवार के साथ खुशियां मनाने वहां गए थे। चिरमिरी के रहने वाले शिवांश जैन की मां ने पत्रकारों को बताया कि बेटा अपने मित्र कुलदीप स्थापक, अरविंद अग्रवाल, हैप्पी बधावान, उनकी पत्नी और बच्चों के साथ घूमने के लिए पहलगाम गए थे। इनमें से कुलदीप स्थापक की पत्नी पूर्वा स्थापक चिरमिरी नगर निगम में भाजपा से वार्ड क्रमांक 13 की पार्षद हैं।

हमले के दौरान मौके पर मौजूद रहीं चिरमिरी की पार्षद पूर्वा स्थापक अपने पति, बच्चों और मित्र मंडली के साथ जान बचाने में कामयाब रहीं ।शिवांश की मां ने बताया कि आतंकवादी हमले के समय सब वहीं मौजूद थे। हमला होते ही सब लॉज की ओर भागकर अपनी जान बचाई। शिवांश की मां ने बताया कि फोन पर बात हुई है कि सब श्रीनगर में सुरक्षित होटल में हैं। परिवार के लोगों ने बताया कि कि महिला-पुरुष को अलग-अलग सुरक्षित श्रीनगर पहुंचाया गया है। सभी चिरमिरी के हल्दीबाड़ी और बड़ी बाजार इलाके के रहने वाले हैं। वहीं जनकपुर और केल्हारी के भी दो परिवार के फंसे होने की खबर है। इस घटना के बाद उनके घर में चिंता और डर का माहौल बना हुआ है। सभी लोग पुलगांव क्षेत्र में रुके हुए हैं ।

कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के दौरान बिलासपुर के दो परिवार भी मौजूद थे। बिलासपुर नगर निगम के मुख्य अभियंता राजकुमार मिश्रा और मैनेजर चन्द्रशेखर साहू श्रीनगर में ट्रेनिंग के बाद 21 अप्रैल की रात परिवार के साथ पहलगाम पहुंचे थे। उनकी 22 अप्रैल को बैसरन जाने की योजना थी, लेकिन हमले की खबर के बाद प्लान बदल दिया। मुख्य अभियंता ने बताया कि जहां आतंकियों ने हमला किया, वहां जाना मुश्किल था। घटना के बाद अब दोनों परिवार वापस लौटने की तैयारी कर रहे हैं।

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