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अल्पसंख्यक आयोग ने ओडिशा में गुरु नानक देव के मठ की जगह पर शौचालय बनाने पर जताई आपत्ति

नई दिल्ली- 26 मई। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) ने ओडिशा सरकार से पुरी के जगन्नाथ मंदिर के पास बने गुरु नानक देव के मठ को तोड़े जाने और वहां पर शौचालय का निर्माण कराए जाने पर आपत्ति जताई है। आयोग ने मुख्य सचिव को नोटिस भेज कर इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

आयोग ने यू-ट्यूब एक वीडियो का संज्ञान लिया है जिसमें बुद्ध दल के निहंग जबर जंग सिंह ने एक वीडियो के माध्यम से आरोप लगाया है कि श्री गुरु नानक देव जी की जगन्नाथ पुरी यात्रा की स्मृति में स्मारक के निर्माण के लिए निर्धारित और आरक्षित स्थान का दुरुपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि वहां पर शौचालय का निर्माण किया जा रहा है। यह उन प्रमुख स्थानों में से एक है जिस पर सिख समुदाय हमेशा दुनियाभर में आंदोलन करता है। जहां श्री गुरु नानक देव जी ने पुजारी के रूप में आरती लिखी और गाई थी (और भगवान जगन्नाथ मंदिर से बाहर आए थे), उसे पूरा सम्मान नहीं दिया जा रहा है।

आयोग ने इस मामले में ओडिशा सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर मामले की विस्तृत जांच करने और 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

उल्लेखनीय है कि गुरु नानक देव से जुड़ी कहानी इस प्रकार है कि पुरी के राजा प्रताप रुद्र देव के शासनकाल के 13वें वर्ष में गुरु नानक देव, मर्दाना और चौदह अन्य संन्यासियों के साथ भादो शुक्ल एकादशी साल 924 (उड़िया वर्ष) के दौरान भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने जगन्नाथ मंदिर पहुंचे थे। उनकी पोशाक से गुरु नानक को एक खलीफा समझ लिया गया और उन्हें मंदिर परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई। गुरु नानक संन्यासियों के साथ समुंदर के किनारे पर चले गए और वहीं से उन्होंने भजन करना शुरू कर दिया।

उस रात पुरी के राजा को सपने में भगवान जगन्नाथ ने आदेश दिया कि मंदिर में नियमित होने वाली आरती बंद कर दी जाए, क्योंकि मैं उस समय वहां नहीं होता। समुद्र किनारे गुरु नानक के भजन सुन रहा होता हूं। आश्चर्यचकित राजा समुद्र किनारे पहुंचे और देखा कि गुरु नानक भजन गा रहे हैं और भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा, वहां खड़े हैं। राजा ने गुरु नानक से क्षमा याचना की। उन्हें कपड़े और गहने अर्पित किए तथा गाजे-बाजे के साथ शाही जुलूस में उन्हें भगवान जगन्नाथ के मंदिर लेकर पहुंचे।

मंदिर के दर्शनों के बाद नानक देव मंदिर के सामने स्थित एक बरगद के पेड़ के पास बैठकर धर्मोपदेश देने लगे। उस स्थान पर आज मंगू मठ स्थित है जिसके लाल झंडे पर उनकी स्मृति में सफेद हथेली का प्रतीक चिन्ह है। गुरु नानक 24 दिन पुरी रुके। जब वे विदा हुए, तब भी राजा ने उन्हें पुरी से लगभग 23 मील की दूरी पर स्थित चंडी नाला तक जाकर प्रभावशाली विदाई दी। सिखों के लिए यह स्थान काफी पवित्र माना जाता है और देश विदेश से सिख श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या यहां पर दर्शन के लिए आती है।

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