
अपने ही देश में विस्थापित जीवन जीने को विवश करोड़ों लोग, सिर्फ 2021 में 5.91 करोड़ लोग हुए विस्थापित
न्यू यॉर्क- 28 मई । दुनिया में देशों के भीतर की आंतरिक मुसीबतें भी कम नहीं हैं। इस कारण करोड़ों लोग अपने ही देश में विस्थापित जीवन जीने को विवश हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन ने आंतरिक विस्थापन निगरानी केंद्र की नई रिपोर्ट में दावा किया है कि वर्ष 2021 में अपने ही देश के भीतर 5.91 करोड़ लोग विस्थापित जीवन जीने को विवश हुए। बीते कुछ वर्षों में यह संख्या लगातार बढ़ रही है।
आंतरिक विस्थापन पर जारी हुई इस वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार 2021 में आंतरिक विस्थापितों की संख्या ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। 2020 की तुलना में आंतरिक विस्थापितों की संख्या 2021 में 40 लाख बढ़ गयी है। नॉर्वे की शरणार्थी परिषद के एक अंग के रूप में वर्ष 1998 में स्थापित आंतरिक विस्थापन निगरानी केंद्र की रिपोर्ट का स्वागत करते हुए संयुक्त राष्ट्र प्रवासन एजेंसी ने कहा कि यह रिपोर्ट आपदाओं एवं अन्य संकटों में घिरे व्यक्तियों एवं समुदायों तक ज़रूरी सहायता पहुंचाने के नज़रिये से अहम है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग के लिए सक्रिय संगठनों, मानवीय राहतकर्मियों और सरकारों को मदद मिलेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 15 वर्षों में आपदाओं की वजह से सबसे अधिक संख्या में लोगों को आंतरिक विस्थापन का शिकार होना पड़ा है। यह संख्या हिंसक संघर्ष एवं टकराव के कारण विस्थापित होने वाले लोगों की संख्या से कहीं अधिक है। बताया गया कि ये रुझान 2021 में भी जारी रहा और आपदाओं की वजह से दो करोड़ 37 लाख लोग अपने देश की सीमाओं के भीतर विस्थापित होने को विवश हुए। इनमें से अधिकांश एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हैं। इसकी वजह बाढ़, तूफ़ान, चक्रवाती तूफ़ान समेत अन्य मौसम संबंधी घटनाएं बताई गयी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन को लेकर जरूरी कार्रवाई के अभाव में इस कारण होने वाले विस्थापितों की संख्या अगले वर्षों में और अधिक बढ़ेगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2021 हिंसक संघर्ष एवं टकराव के कारण भी बड़े आंतरिक विस्थापन का गवाह बना है। हिंसक संघर्ष एवं टकराव के कारण वर्ष 2021 में एक करोड़ 44 लाख लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए। यह संख्या उससे पहले के वर्ष यानी 2020 की तुलना में 50 फ़ीसदी की वृद्धि दर्शाती है। अधिकांश मामलों में आंतरिक विस्थापन अफ़्रीका, विशेष रूप से इथियोपिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में हुआ है। इसके अलावा, अफ़ग़ानिस्तान और म्यांमार में भी हिंसा एवं टकराव के कारण अभूतपूर्व संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं।



