
अनुकंपा नेतृत्व शिखर सम्मेलन में बोले दलाईलामा, कहा- मैंने अपना देश खोया,भारत बना मेहमानवाज
धर्मशाला- 20 अक्टूबर। तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा ने कहा कि हमें यह याद रखना होगा कि यह दुनिया हमारा एकमात्र घर है। ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव एक अलग मामला है लेकिन यह दुनिया एक सुखद जगह है। उन्होंने कहा कि मैंने अपना देश खो दिया लेकिन भारत बहुत मेहमानवाज रहा है। मैं यहां और अन्य जगहों पर अन्य लोगों से मिला हूं और देखा है कि मनुष्य के रूप में हम शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से एक जैसे हैं।
उन्होंने कहा कि मैं एक शरणार्थी हूं। मैंने अपना देश खो दिया, लेकिन हम जहां भी हैं, फिर भी हम इंसान हैं। धर्मगुरू अनुकंपा नेतृत्व शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन वीरवार को मैकलोड़गंज स्थित अपने निवास स्थान पर विश्व भर से आए युवा नेताओं को संबोधित कर रहे थे।
दलाई लामा ने कहा कि जब मैं किसी को देखकर मुस्कुराता हूं, तो वे लगभग हमेशा मुस्कुराते हैं। इंटरनेट, टेलीविजन और रेडियो के माध्यम से हम बाकी दुनिया के संपर्क में रह सकते हैं। पूरी आबादी हमारा समुदाय बन गई है और सात से आठ अरब मनुष्य हमारे परिवार का हिस्सा बन गए हैं। हमें साथ रहना है। हम दूसरे ग्रह पर नहीं जा सकते। आसमान में चांद खूबसूरत दिखता है, लेकिन हम वहां नहीं रह सके।
युवा नेताओं के सवालों का जबाव देते हुए दलाई लामा ने कहा कि हम तिब्बतियों ने पाया कि हम अकेले नहीं, बल्कि मानवता के अंग हैं। हमें बड़ी मदद मिली। जब मैं अपनी मातृभूमि से भागा, पहाड़ों से चलते हुए मैंने सोचा कि क्या होगा। जब हम भारत पहुंचे तो हमें कई ऐसे लोग मिले जिन्होंने गर्मजोशी से हमारा स्वागत किया। दलाई लामा ने कहा कि मुझे तिब्बती समुदाय के बारे में सोचना होगा क्योंकि वे मुझमें आशा रखते हैं। वे मुझे अपने दृढ़ संकल्प को मजबूत करने के लिए देखते हैं। परंपरागत रूप से तिब्बती लोगों ने अपने नैतिक सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए दलाई लामा की ओर देखा है। इस दौरान युवा नेताओं ने अपने निजी जीवन सहित अन्य समस्याओं पर धर्मगुरू से सवाल पूछे जिनके जबाव दलाई लामा ने दिए।



