सूडान में आपरेशन कावेरी शुरू, 278 भारतीयों का पहला जत्था जेद्दा के लिए रवाना

खार्तुम/नई दिल्ली- 26 अप्रैल। सूडान में हिंसा के बीच ऑपरेशन कावेरी के तहत 278 भारतीय नागरिकों का पहला जत्था आईएनएस सुमेधा से जेद्दा के लिए रवाना हो गया है। इसके साथ ही सूडान में 72 घंटे के युद्ध विराम के दौरान वहां फंसे भारतीय नागरिकों को आवश्यक राहत सामग्री भी पहुंचाई गई।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार ऑपरेशन कावेरी के तहत तीन हजार भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए ऑपरेशन कावेरी शुरू किया है। नौ सेना का दूसरा जहाज आईएनएस तेग भी सूडान के तट पर पहुंच गया है। भारत ने सूडान में फंसे भारतीयों को को निकालने व राहत सामाग्री पहुंचाने के लिए सऊदी अरब के शहर जेद्दा में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। इस बीच विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन भारतीयों को निकालने के मिशन की निगरानी के लिए जेद्दा पहुंच चुके हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक ट्वीट में बताया कि ऑपरेशन कावेरी के तहत सूडान में फंसे 278 भारतीयों का पहला जत्था आईएनएस सुमेधा से जेद्दा के लिए रवाना हो गया। जेद्दा से भारतीय नागरिकों को भारतीय वायु सेना के विमानों से देश लाया जाएगा।

एक अन्य ट्वीट में बागची ने कहा कि भारतीयों को निकालने के लिए दूसरा आईएनएस तेग भी सूडान के तट पर पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन कावेरी के तहत और भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए अधिकारियों के साथ आईएनएस तेग जरूरी राहत सामाग्री के साथ सूडान तट के दूतावास कैंप कार्यालय पर पहुंच गया है। सूडान में पिछले 12 दिनों से सेना और पैरामिलिट्री समूह के बीच भयंकर युद्ध में अबतक चार सौ लोगों की मौत हो चुकी है। सूडान से भारतीयों को निकालने के लिए भारत के प्रयास से सेना और पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्स (आरएसएफ) के बीच 72 घंटे के युद्ध विराम पर सहमति बनी है।

विदेश राज्यमंत्री मुरलीधरन ने कहा कि भारतीयों को निकालने के लिए सूडान और जेद्दा में जरूरी तैयारी की गई है। जेद्दा पहुंचने पर उन्होंने यहां स्थापित नियंत्रण कक्ष का दौरा किया।

उल्लेखनीय है कि भारत ने हिंसाग्रस्त सूडान से अपने नागरिकों को निकालने के लिए सोमवार को ऑपरेशन कावेरी शुरू किया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा था कि सूडान में फंसे हमारे नागरिकों को वापस लाने के लिए ऑपरेशन कावेरी शुरू हो गया है। भारतीय जहाज और विमान भारतीयों को स्वदेश लाने के लिए तैयार हैं।

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Author: lakshyatak

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