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वित्त वर्ष 2020-21 में मिली सरकारी रकम खर्च करने में नाकाम रहा दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग

नई दिल्ली, 27 नवंबर। दिल्ली में अल्पसंख्यक वर्ग के कल्याण के लिए बड़ी-बड़ी बातें करने वाली अरविंद केजरीवाल की सरकार अल्पसंख्यकों के प्रति कितनी संवेदनशील है, इसकी पोल एक आरटीआई ने खोल दी है। दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने एक आरटीआई के जवाब में कहा है कि दिल्ली सरकार की तरफ से अल्पसंख्यक कल्याण और उनके हितों की रक्षा के लिए वित्त वर्ष 2020-21 में उन्हें 2 करोड़ 38 लाख 58 हजार रुपये जारी किए गए, जिसमें से आयोग ने एक करोड़ 58 लाख 54 हजार रुपये ही खर्च किए हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें से लगभग 80 लाख रुपये आयोग ने वेतन और भत्तों पर खर्च किया है। बाकी बचे 58 लाख 83 हजार रुपये कार्यालय खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर किया गया है। अल्पसंख्यक समुदाय में जागरुकता पैदा करने के लिए और उनके सामाजिक आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए शोध कार्यों, सेमिनार, जागरुकता कैंप आदि पर आयोग की तरफ से बहुत ही कम पैसे खर्च किए गए हैं।

दिल्ली सरकार की तरफ से हमेशा यह दावा किया जाता रहा है कि वह अल्पसंख्यकों के कल्याण और उनके उत्थान के लिए बहुत कुछ कर रही है। इस कार्य के लिए गठित अल्पसंख्यक आयोग का हवाला देकर सरकार की तरफ से हमेशा अपनी पीठ थपथपाई जाती रही है। दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा और उनके कल्याण के लिए कितना काम कर रहा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने वित्त वर्ष 2020-2021 में प्रोजेक्ट और कैंप के आयोजन पर महज चार लाख 8640 रुपये ही खर्च किए हैं।

आयोग का बुनियादी काम अल्पसंख्यक क्षेत्रों में जागरुकता कैंप आयोजित करना है, लेकिन आयोग ने सबसे कम पैसा इसी मद में खर्च किया है। कार्यालय के रखरखाव सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए आयोग ने अच्छी खासी रकम खर्च की है। शोध कार्यों और सेमिनार आदि पर आयोग ने बिल्कुल भी पैसा खर्च नहीं किया है जबकि आयोग का एक बुनियादी काम यह भी है कि वह दिल्ली में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय से सम्बंधित तमाम तरह की जानकारियां एकत्र करने के लिए रिसर्च कराए और उससे प्राप्त होने वाले नतीजों से सरकार को अवगत कराए, लेकिन वर्तमान आयोग की तरफ से फिलहाल इस तरह की कोई रिसर्च नहीं कराई गई है और ना ही कोई रिपोर्ट तैयार कराई गई है।

दिल्ली सरकार की तरफ से आयोग को उपलब्ध कराई गई एकं मोटी रकम को आयोग ने बिना कोई काम किए सरकार को वापस कर दिया है। जबकि सरकार के जरिए दी गई इस रकम से अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए बहुत सारी योजनाएं और कार्यक्रम चलाया जा सकता था। इस सिलसिले में आयोग के अध्यक्ष जाकिर खान से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने आरटीआई के सम्बंध में दी गई जानकारी पर किसी भी तरह की कोई सफाई देने से इनकार कर दिया।

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