
वर्ष 2030 तक कच्चे तेल की अपनी मांग का 25 प्रतिशत उत्पादन करने में सक्षम होगा भारतः हरदीप पुरी
जयपुर- 14 अक्टूबर। भारतीय पेट्रोलियम उद्योग अवसर के शिखर पर है और 2030 तक कच्चे तेल की अपनी मांग का 25 प्रतिशत उत्पादन करने में सक्षम होगा। वर्तमान में हमारे देश में हर दिन 50 लाख बैरल पेट्रोलियम की खपत हो रही है और इसमें भी तीन प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, जो वैश्विक औसत लगभग एक प्रतिशत से अधिक है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को यहां जेईसीसी सीतापुरा में शुरू हुए तीन दिवसीय साउथ एशियन जियो साइंस कॉन्फ्रेंस जियो इंडिया 2022 में मीडिया से यह बात कही। इस दौरान उद्घाटन सत्र में उन्होंने वरिष्ठ भूविज्ञानी श्याम व्यास राव, पूर्व निदेशक (अन्वेषण), ओएनजीसी को भी लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया।
पहले दिन केंद्रीय मंत्री ने जियो इंडिया 2022 की प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। जहां कई भारतीय और वैश्विक पेट्रोलियम कंपनियां और सेवा प्रदाता तेल और गैस की खोज और उत्पादन के लिए अपनी अत्याधुनिक सेवाओं और उपकरणों का प्रदर्शन कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र में मंत्री ने कहा कि पेट्रोल में इथेनॉल-मिश्रण प्रतिशत 2013 में 0.67 प्रतिशत से बढ़कर मई 2022 में 10 प्रतिशत हो गया है, यानी निर्धारित समय से 5 महीने पहले। यह 2.7 मिलियन टन सीओ 2 उत्सर्जन को कम कर रहा है जो पर्यावरण के लिए अच्छा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुमानों के अनुसार, भारत आने वाले दो दशकों में वैश्विक ऊर्जा खपत में वृद्धि का एक चौथाई (25 प्रतिशत) योगदान देगा। बीपी का अनुमान है कि भारत की ऊर्जा मांग दोगुनी हो जाएगी, जबकि प्राकृतिक गैस की मांग 2050 तक पांच गुना बढ़ने की उम्मीद है।
पेट्रोलियम सचिव पंकज जैन ने कहा कि भूविज्ञान विशेषज्ञों को इस अवसर का उपयोग ऊर्जा स्रोतों की बढ़ती मांग और कमी के संदर्भ में अपने योगदान को बढ़ाने के लिए करना चाहिए। उन्होंने भू-वैज्ञानिक बिरादरी से गहरे पानी, अल्ट्रा-डीप वाटर और ऑनशोर के लिए अनुकूल ज्ञान विकसित करने के लिए कहा जिससे बेहतर पर्यावरण संतुलन के साथ तेल और गैस उत्पादन को बढ़ाया जा सके।



