
लोकतंत्र,तकनीक व योग्यता के साथ भारत दुनिया के लिए आशा का गुलदस्ता: PM
नई दिल्ली- 17 जनवरी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को भारत को दुनिया के लिए आशा का गुलदस्ता बताया और कहा कि इस गुलदस्ते में लोकतंत्र के प्रति अटूट आस्था, 21वीं सदी को सशक्त बनाने वाली प्रौद्योगिकी और भारतीयों की मन-मिजाज और प्रतिभा भी है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज विश्व आर्थिक मंच के दावोस एजेंडा में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘विश्व की वर्तमान स्थिति’ (स्टेट ऑफ द वर्ल्ड) पर विशेष भाषण दिया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पृथ्वी के हितों के अनुरूप जीवनशैली अपनाये जाने पर जोर देते हुए कहा कि हमें उपभोक्तावाद तथा ‘उपभोग करो और फेंक दो’ के रवैये से निजात पाना होगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के लिए हमारी जीवनशैली भी एक बड़ी समस्या है। दुनिया को ऐसी अर्थव्यवस्था की ओर आगे बढ़ना होगा, जिसमें मानव उपयोग में लाए जाने वाली वस्तुओं का फिर से इस्तेमाल हो सके। उन्होंने पर्यावरण हितैषी जीवनशैली को एक जनआंदोलन बनाने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हमें यह सोचना होगा कि अतीत में जिन विश्व संस्थाओं की स्थापना की गई थी क्या वह नई चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि जब यह संस्थायें बनी थी तब हालात अलग थे और नई विश्व व्यवस्था में चुनौतियां और परिस्थितियां अलग हैं। उन्होंने कहा कि हर लोकतांत्रिक देश का यह दायित्व है कि वह पुरानी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार पर बल दे ताकि इन्हें वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों के बीच सहयोग के जरिए ही जलवायु परिवर्तन आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और क्रिप्टोकरंसी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जिस तरह प्रौद्योगिकी इनके साथ जुड़ी है उस संबंध में कोई एक देश अपने बलबूते इनका सामना नहीं कर सकता। सभी देशों को एक जैसा रवैया अपनाना होगा। मोदी ने कहा कि हर विश्व संस्था को सामूहिक रूप से और आपसी तालमेल के साथ विश्व परिवार के सामने मौजूदा चुनौतियों का सामना करना होगा।
प्रधानमंत्री ने दुनिया के उद्यमियों और निवेशकों के कहा कि भारत निवेश के लिहाज से आज सबसे आकर्षक गंतव्य है। भारत में अगले 25 वर्षों को ध्यान में रखकर निर्णय लिये जा रहे हैं तथा नीतियां बन रही हैं। देश ने अपने सामने उच्च वृद्धि के साथ ही कल्याण एवं खुशहाली का लक्ष्य रखा है। भारत की आर्थिक प्रगति का आगामी कालखंड हरित,स्वच्छ,टिकाऊ और भरोसेमंद होगा।
उन्होंने कहा कि भारत आज आत्मनिर्भरता के रास्ते पर चलते हुए केवल कारोबार की प्रक्रिया को ही आसान नहीं बना रहा बल्कि निवेश और उत्पादन को भी प्रोत्साहित कर रहा है। इसी नीति के तहत अर्थव्यवस्था के 14 क्षेत्रों में 26 अरब डॉलर की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन की योजना को लागू किया गया है।
मोदी ने कहा कि कारोबार को सुगम बनाने के लिए सरकार ने अपनी दखलअंदाजी को कम किया है तथा कार्पोरेट करों में कटौती कर उनसे जुड़े नियमों को आसान बनाया है। भारत में करों की दरें काफी कम हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लोगों में नावाचार और नई प्रोद्योगिकी को अंगिकार करने की अपार क्षमता है। हमारी उद्यमशीलता विदेशी साझीदारों को नई ऊर्जा दे सकती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में भी भारत की विकास यात्रा जारी रही है। भारत ने एक पृथ्वी और एक स्वास्थ्य के आदर्श पर चलते हुए दुनिया के अनेक देशों को वैक्सीन और चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति की है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दवा निर्माता देश है। वास्तव में भारत दुनिया का औषधालय बन गया है।
प्रधानमंत्री ने देश में सफल टीकाकरण अभियान का जिक्र करने के साथ ही दुनिया के अन्य देशों को वैक्सीन मुहैया कराए जाने का उल्लेख भी किया। इसके माध्यम से करोड़ों लोगों की जीवनरक्षा हो सकी।



