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मेघालय के राज्यपाल मलिक ने कहा:- मैं किसानों के मुद्दों पर बोलता हूं तो कंट्रोवर्सी हो जाती है

जयपुर- 07 नवंबर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में रविवार को बिरला सभागार में तेजा फाउंडेशन की ओर से आयोजित ग्लोबल जाट समिट में शिरकत करने आए मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने किसान आंदोलन का समाधान नहीं होने पर एक बार फिर केंद्र सरकार और बड़े नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि आज तक इतना बड़ा आंदोलन नहीं हुआ। किसान आंदोलन में अब तक छह सौ लोग शहीद हुए। श्वान भी मरता है तो दिल्ली के नेताओं का शोक संदेश जाता है। हमारे छह सौ किसान अब तक शहीद हो चुके हैं। उन पर कोई नेता नहीं बोला। सत्यपाल मलिक ने कहा कि उन्होंने पीएम मोदी को भी कहा था कि आप गलतफहमी में हो, ना तो सिक्खों को हराया जा सकता है और ना ही जाटों को। किसानों के साथ दो काम मत करना, एक तो इन पर बल प्रयोग मत करना और दूसरा इन्हें खाली हाथ मत भेजना। यह तीन सौ साल तक नहीं भूलने वाली कौम है।

मुझे पद से हटाएंगे तो एक हट जाऊंगा—

उन्होंने कहा कि जब मैं किसानों के मुद्दों पर बोलता हूं तो कंट्रोवर्सी हो जाती है। मेरे शुभचिंतक इसी तलाश में रहते हैं कि मैं कुछ बोलूं और मुझे हटा दें। मैं मां के पेट से गर्वनर पैदा नहीं हुआ। मेरे पास जो है, उसे छोड़ने के लिए तैयार हूं। मैं यह नहीं देख सकता कि किसानों के साथ जुल्म हो रहा हो, उन्हें डराया जा रहा हो। हम चुपचाप पदों पर बैठे रहें, यह नहीं हो सकता। मुझे दो-तीन लोगों ने गवर्नर बनाया है और यह मुझे पता है कि जब मैं किसान आंदोलन के बारे में बोल रहा हूं तो मैं उनकी इच्छा के विरूद्ध बोल रहा हूं। जब भी मुझे वे लोग कहेंगे मैं तुरंत हट जाऊंगा, एक भी मिनट नहीं लगाऊंगा। पहले दिन से ही यही सोच कर मैं किसानों के समर्थन में बोल रहा हूं।

इस बात से मैं आहत होकर बोला हूं—

उन्होंने कहा कि वह इस बात से मैं आहत होकर बोला हूं। अभी महाराष्ट्र के अस्पताल में 5-7 लोग आग से मरे। उनकी मौत पर दिल्ली से शोक संदेश गए हैं। किसानों की मौत पर हमारे वर्ग तक के लोग संसद में शोक प्रस्ताव के लिए नहीं बोले। इससे मैं आहत था। गुस्से में था।

किसान आंदोलन का असर भारत की सेनाओं पर भी पड़ा—

मलिक ने कहा कि किसान आंदोलन का असर भारत की सेनाओं पर भी पड़ा है। वहां भी इन्हीं किसानों के बेटे हैं। कुछ भी हो सकता है। आज आप ताकत में हो। युद्ध होता है तो इन्हीं किसानों के लडकों को झोंका जाता है। कारगिल में सरकार की गलती थी। इसकी कीमत किसान के बच्चों ने चुकाई। अन्याय हमारे ही साथ होता है। इसमें किसी न किसी दिन लोग रिएक्ट कर जाते हैं। अभी तक किसानों ने कंकर भी नहीं मारा है।

लालकिले पर झंडा फहराने के मामले को खूब उछाला—

मलिक ने कहा कि लालकिले पर झंडा फहराने के मामले को खूब उछाला गया। लाल किले पर झंडा फहराने का अधिकार प्रधानमंत्री का है। प्रधानमंत्री के बाद तो लाल किले पर झंडा फहराने का अधिकार किसानों का ही है। गुरु तेगबहादुर की गर्दन लालकिले पर कटी हो तो क्या उनकी संतान को लालकिले पर झंडा फहराने का अधिकार नहीं है? सिखों और जाटों के लोकगीतों में भी लालकिले तक जाने का उल्लेख होता है। लाल किला हमारे वर्गों के इमोशन का हिस्सा रहा है। हरियाणा में केवल इस बात पर लोकदल खड़ा हो गया था कि चौधरी चरण सिंह को लालकिले पर चढ़ाना है। पीएम के अलावा लालकिले पर किसी को अधिकार है तो वह हमारा है। उस जगह तो झंडा नहीं फहराया, जहां पीएम फहराते हैं। साइड में दूसरी जगह फहराया था।

केंद्र सरकार केवल एमएसपी मान ले तो काम हो जाएगा—

मलिक ने कहा कि केंद्र सरकार केवल एमएसपी मान ले तो काम हो जाएगा। किसान को एमएसपी से हर फसल का नीचे ही दाम मिलता है। एमएसपी पर कानून से कम पर किसान नहीं मानेंगे। एमएसपी पर कानून कई लोग नहीं बनने देना चाहते क्योंकि उस कारण से किसी का नुकसान होता है। अडाणी का पानीपत में गोदाम बन गया, जब तक पार्लियामेंट में कानून ही पास नहीं हुआ था। मैं लिखकर देता हूं कि एमएसपी रहेगी। एमएसपी को कानूनी जामा पहनाया जाएगा।

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