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मिथिलांचल-कोसी में शुरू हुई रेल सेवा, 88 साल का इंतजार खत्म

पटना/सुपौल/मधुबनी- 07 मई। बिहार के कोसी और मिथिलांचल वासियों के लिए शनिवार का दिन यादगार रहा। 88 वर्षों के बाद यह दोनों क्षेत्र आज से रेलमार्ग से जुड गए हैं। पहली बार निर्मली रेलवे स्टेशन पर झंझारपुर से सवारी गाड़ी निर्मली होते हुए कोसी महासेतु होकर सुपौल ,सहरसा तक के लिए प्रस्थान हुई। रेल मंत्री अश्वनी बैष्णव ने दिल्वीली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरी झंडी दिखाकर मधुबनी जिला के झंझारपुर रेलवे स्टेशन से दोपहर 2:12 बजे इसे रवाना किया।

झंझारपुर से गाड़ी संख्या- 05553 को दो पायलट मनोज कुमार यादव व छोटे कामेत ने घोघरडीहा होते हुए 3:26 बजे निर्मली रेलवे स्टेशन पहुंची। निर्मली स्टेशन पर मात्र दो मिनट ट्रेन रुकी और 3:28 बजे फिर आसनपुर-कूपहा के लिए रवाना हो गई। ट्रेन निर्मली पहुंचते ही लोगों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लोगों ने ताली बजाकर स्वागत करते हुए खुशी जाहिर किया। स्टेशन परिसर में निर्मली सहित सुपौल मधुबनी जिले के दर्जनों गांव के लोगो की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगो ने ऐतिहासिक पल को अपने नजरों से देखा।

सुपौल रेलवे स्टेशन पर शाम पांच बजे ट्रेन पहुंची, जहां लोगों ने स्वागत किया। निर्मली रेलवे स्टेशन पर ट्रेन चलने को लेकर कुल 1390 का टिकट काटा गया। बड़ी संख्या में लोगो ने टिकट कटाकर रेल का सफर तय किया। रेल पर निर्मली से पहली बार सफर करने वालो में आलोक, राहुल, राजेश, मुस्ताक, अलि अनवर ने बताया कि पहली बार निर्मली रेलवे स्टेशन से आसनपुर को कोसी महासेतु होते हुए सरायगढ़ भपटियाही व सुपौल के लिए सफर किया है, जिससे काफी खुशी महसूस हो रही है। उन लोगों ने कहा कि 88 साल का सपना पूरा हो गया। ट्रेन से पहली बार कोसी व मिथिलांचल का सफर तय किया है।

88 साल बाद कोसी और मिथिलांचल एक सूत्र में बंधा—-

1934 में आए विनाशकारी भूकंप में कोसी-मिथिलांचल दो भागों में विभक्त हो गई थी। तब से लेकर आज तक 88 सालों के लम्बे सफर के बाद सात मई का दिन ऐतिहासिक रहा जो एक बार फिर कोसी और मिथिलांचल एक सूत्र में बंधा गया। इसको लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने 6 दिसंबर 2003 को निर्मली महाविद्यालय के प्रांगण कोसी और मिथिलांचल को एकीकरण करने को लेकर शिलान्यास किया था।

निर्मली से दरभंगा व सहरसा तक का लोग सफर कर पाएंगे—

शनिवार को ट्रेन चार बजे सरायगढ स्टेशन पहुंची और 4:15 बजे सुपौल के लिए रवाना हो गई। झंझारपुर से सरायगढ तक पहुंचने में ट्रेन को एक घंटा 50 मिनट का समय लगा। लोको पायलट मनोज कुमार यादव, सहायक लोको पायलट एनके उज्जवल, डीआई हरीश कुमार सिंह, स्टेशन अधीक्षक रामबाबू सहित अन्य ने कहा कि बहुत ही खास और सुनहरा अवसर है कि 88 वर्षों के बाद पहली बार उसी और मिथिलांचल को जोड़ने वाली पहली ट्रेन चलाकर झंझारपुर से सरायगढ़ पहुंची है। पहली बार झंझारपुर से सरायगढ़ का स्टेशन पहुंचने में हर जगह आम लोगों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। अन्य लोगों में काफी उत्साह देखा गया।

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