
मधुबनी-30 अक्टूबर। जिले में सिर्फ 37. 86 फीसदी छात्रों के पास पाठ्यपुस्तक है। यानि लगभग 70 फीसदी बच्चे बिना पाठ्यपुस्तक के ही अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सहज ही सवाल उठने लगा है। जबकि सभी बच्चों के खाता में पुस्तक खरीद के लिए राशि विभाग से डीबीटी के माध्यम से भेज दी गयी है। जिले की इस असंतोषजनक प्रगति को लेकर विभाग ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। जिसके आलोक में डीइओ नसीम अहमद ने सभी संबंधित को चेतावनी दी है। पाठ्यपुस्तक की उपलब्धता के लिए दिए गए निर्देश की अवहेलना का आलम यह है कि इसके लिए समग्र शिक्षा अभियान के द्वारा बीइओ की बैठक का अयोजन 27 को किया गया। परंतु इस बैठक में अधिकतर बीइओ या उनके प्रतिनिधि नहीं शामिल हुए। 21 में से केवल 12 प्रखंड के ही प्रखंड षिक्षा पदाधिकारी एवं प्रखंड संसाधन सेवी शामिल हुए। अंधराठाढ़ी,बाबूबरही, घोघरडीहा, हरलाखी,झंझारपुर, लौकही,लखनौर, मधेपुर एवं मधवापुर प्रखंड के बीइओ व बीआरपी उपस्थित नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति को लेकर डीपीओ चंदन प्रभाकर ने इन सभी प्रखंड के बीइओ एवं बीआरपी स्पष्टीकरण पूछा है।
50 फीसदी बच्चें पुस्तक से वंचित——
मधुबनी। जिले के 11 प्रखंड के 50 फीसदी बच्चों के पास किताब नहीं है। इनमें बासोपट्टी,बिस्फी,घोघरडीहा,झंझारपुर, खुटौना, लौकही, मधेपुर,पंडौल,फुलपरास,राजनगर एवं अंधराठाढ़ी प्रखंड क्षेत्र के 50 फीसदी बच्चें पुस्तक से वंचित हैं। इन सभी प्रखंड के बीइओ और बीआरपी को शोकॉज किया गया है। वहीं हरलाखी, जयनगर,लखनौर,मधवापुर एवं रहिका में 50 फीसदी से अधिक बच्चों के पास पुस्तक है। डीपीओ ने यहां पर सभी बच्चों को पुस्तक उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इधर षिक्षा विभाग के व्यवस्था पर सवाल उठने लगा है कि ऐसे हालत में शिक्षा के गुणवत्ता की बात करना बईमानी होगी।



