
भारत से भी महंगा पेट्रोल डीजल अब नेपाल में
पटना-26 मई। भारत सरकार द्वारा पेट्रोल डीजल के दाम में कटौती तो नेपाल में पेट्रो मूल्यों में हुई वृद्धि से सीमाई क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर भीड बढने लगी है।पहले नेपाली पेट्रोल पंपों पर भारतीय वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती थी लेकिन अब भारत के सीमाई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारे देखने को मिल रही है।इसका बडा कारण भारत सरकार द्वारा पेट्रोलियम पदार्थो के दामो मे की गई कमी तो वही दूसरी ओर नेपाल सरकार द्धारा आर्थिक संकट से उबरने के लिए एक सप्ताह में लगातार दूसरी बार दस रुपया प्रति लीटर पेट्रोल पर दाम बढ़ाए हैं।विगत कई वर्षों से बिहार की अपेक्षा नेपाल में 15 से 25 रूपये प्रति लीटर पेट्रोल डीजल सस्ता मिलता था। जबकि भारत से ही नेपाल को पेट्रोल- डीजल की आपूर्ति होती है।
नेपाल आयल निगम के रविवार देर रात से जो बढ़ोतरी की गई है जिससे बिहार के सीमाई इलाके के पेट्रोल पंप संचालक बड़ी राहत की सांस ले रहे है । रक्सौल के एक पेट्रोल पंप संचालक विकास सिकरिया ने बताया कि विगत कई सालो के बाद सोमवार से नेपाल की अपेक्षा बिहार में पेट्रोल लगभग चार रुपया सस्ता मिलेगा। वही डीजल भी नेपाल से लगभग सात रुपया सस्ता मिलेगा । जिससे उनके व्यापार में जो ग्रहण लग गए थे वे अब छटेंगे।बता दे कि रक्सौल व आदापुर समेत सीमाई भारतीय इलाके में अनेकों पेट्रोल पम्पो में ताला लग गया था। नेपाल से बड़े पैमाने पर पेट्रोलियम पदार्थो की तस्करी भी धड़ल्ले से जारी थी। इतना ही नही इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से पेट्रोलियम खरीद के बाद नेपाल में विक्रय मूल्यों की वजह से नेपाल ऑयल निगम चालू वर्ष में 47 अरब रुपये नेपाली मुद्रा का घाटा उठा चुकी है।
इसकी पुष्टि करते हुए निगम के सह प्रवक्ता पुष्कर कार्की ने बताया कि रूस यूक्रेन युध्द की वजह से प्रशोधित तेल के अंतराष्ट्रीय कीमत में वृद्धि व डॉलर में पेमेंट की वजह से निगम लगातार घाटे में जा रही है।मूल्य वृद्धि का कारण घाटा को कम करना है।उनके मुताबिक,नए मूल्य समायोजन के उपरांत पेट्रोल में 1 अरब व डीजल में 3अरब 40 करोड़,एलपीजी गैस में 3 अरब नेपाली मुद्रा का मासिक घाटा उठाना पड़ेगा।उन्होंने बताया कि निगम भारत को प्रति माह 43 अरब भुगतान करता है।विक्रय से प्राप्त 20 अरब 60 करोड़ रुपये भुगतान हो पाता है।जबकि,22 अरब 40 करोड़ रुपये प्रति माह बकाया बढ़ रहा है।इसी कारण चालू वर्ष में 47अरब रुपये घाटा उठाना पड़ा है।हालांकि अब भारत मे तेल सस्ती होने के बाद नेपाल निगम को घाटा को पूरा करने का मौका मिला है।



