
बेलारूस में हजारों लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन: UN
जिनेवा- 09 मार्च। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने बेलारूस में हो रहे मानवाधिकारों के सरकारी दमन पर मंगलवार को रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा है कि बेलारूस में वहां की सरकार ने हजारों लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन किया है। इस दमन ने सरकार विरोधी अनगिनत नागरिकों, पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और वकीलों के जीवन को प्रभावित किया है। उन्हें अब तक यह भी नहीं बताया गया कि उनका अपराध क्या है।
ओएचसीएचआर ने इस रिपोर्ट में 9 अगस्त, 2020 के चुनाव से लेकर 31 दिसंबर, 2021 के मध्य बेलारूस में हुए मानवाधिकार के उल्लंघन की घटनाओं का उल्लेख है। यह रिपोर्ट सरकार के सताए 145 लोगों से बातचीत कर तैयार की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा राष्ट्रपति के 9 अगस्त को चुनाव में जीत की घोषणा के बाद विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। इन लोगों की आवाज को कुचलने के लिए “बड़े पैमाने पर हिंसक कार्रवाई” की गई। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला किया गया।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाचेलेट ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि बेलारूस में मई 2020 से मई 2021 के बीच कम से कम 37,000 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें से कइयों को 15 दिन तक हिरासत में रखा गया। 9 अगस्त से 14 अगस्त के बीच करीब 13,500 लोगों को मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया गया या हिरासत में लिया गया। इन सभी को यातना दी गई। 2021 के आखिर तक 969 लोग जेल में थे। इनमें से कइयों को 10 साल या उससे अधिक की सजा सुनाई गई। 4 मार्च, 2022 तक जेल में भेजे गए लोगों की संख्या बढ़कर 1,084 हो गई।
इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बेलारूस में सरकार ने मौलिक अधिकारों को कम करने के लिए कठोर कानून बनाए। इसके लिए विधायी संशोधन पारित किए। इसके बाद नागरिकों, मानवाधिकार संगठनों और मीडिया को निशाना बनाया गया। अक्टूबर तक 270 गैर सरकारी संगठनों को बंद कर दिया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष के अंत तक 32 पत्रकारों को हिरासत में लिया गया। 13 मीडिया घरानों को ‘चरमपंथी’ घोषित किया गया। दमन के खिलाफ मुकदमे लड़ने वाले वकीलों को हिरासत में लेकर उन्हें धमकाया गया और तमाम तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए। नवंबर 2021 तक 36 वकीलों के प्रैक्टिस करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।



