
बिहार में अक्टूबर के मुकाबले नवंबर में बेरोजगारी दर में बढ़ोत्तरी
पटना- 18 दिसंबर। सेंटर फार मानिटरिंग इंडियन इकानामी (सीएफएमआईई) की ताजा जारी रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में बेरोजगारी की दर बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर के 13.9 प्रतिशत की तुलना में नवंबर में 14.8 प्रतिशत बेरोजगारी दर दर्ज की गई है। सितंबर के 10 प्रतिशत से तुलना करें तो दो महीने के भीतर बेरोजगारी दर में 4.8 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
शहरी क्षेत्रों में नवंबर महीने में बेरोजगारी दर 8.21 प्रतिशत रही। यह ग्रामीण दर 6.44 प्रतिशत से अधिक है।हालांकि, नवंबर में देश के कई अन्य राज्यों में भी बेरोजगारी दर बढ़ी। साधन संपन्न हरियाणा इस मामले में शीर्ष पर रहा। वहां 29.3 प्रतिशत बेरोजगारी दर दर्ज की गई है।
अन्य राज्यों की तुलना करें तो हरियाणा के अलावा राजस्थान और जम्मू कश्मीर से बिहार की हालत अच्छी है। जम्मू-कश्मीर में 21.4 और राजस्थान में बेरोजगारी दर 20.4 प्रतिशत है।बिहार की तुलना में झारखंड की स्थिति ठीक कही जा सकती है। झारखंड में यह 11. 2 प्रतिशत है।
मनरेगा के तहत चालू वित्तीय वर्ष में 20 करोड़ श्रम दिवस सृजित करने का लक्ष्य रखा गया था। वित्तीय वर्ष के आठ महीने में यानी नवम्बर तक सिर्फ 11 करोड़ श्रम दिवस सृजित हो पाए। यह लक्ष्य का 55 प्रतिशत है। अगर महीने के हिसाब से लक्ष्य हासिल होता तो साढ़े 13 करोड़ से अधिक श्रमिकों को काम मिल सकता था। हालांकि, राज्य में जदयू कोटे से ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने दावा किया है कि वित्तीय वर्ष के बचे महीनों में लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा लेकिन जमीनी सच कुछ और कह रहा है। केंद्र ने मनरेगा मजदूरों के बकाये का पूरा भुगतान नहीं किया है। राज्य सरकार लिखा पढ़ी कर रही है।
बेरोजगारी की दूसरी बड़ी वजह बालू की कमी के कारण निर्माण क्षेत्र की सुस्ती है। बालू की कमी के कारण यह क्षेत्र लगभग साल भर से सुस्त चल रहा है। निजी निर्माण के अलावा सरकारी निर्माण भी प्रभावित हो रहा है। राज्य सरकार ने बालू खनन के लिए नया पट्टा दिया है। अगर बालू की उपलब्धता सहज हुई तो इस क्षेत्र में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।बालू के अलावा अन्य निर्माण सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि भी इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को कम कर रही है।



