
प्याज उत्पादन का हब बनेगा मीरजापुर, व्यवसायिक खेती को दें बढ़ावा
मीरजापुर- 17 दिसम्बर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय ने गौतम कल्लू रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन और एग्रीमित्र फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के सहयोग से धनवंतरी देवी इंटर कालेज जलालपुर माफी में प्याज की व्यवसायिक खेती पर किसान संगोष्ठी का आयोजन किया। इसमें मीरजापुर, वाराणसी, सोनभद्र, बलिया और विंध्याचल के विभिन्न भागों से कुल 108 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। 38 महिलाएं भी शामिल थीं।
आइसीएआर-आइआइवीआर वाराणसी के पूर्व निदेशक डाॅ. पीएस नाइक ने खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नई कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने में अग्रणी भूमिका के लिए मीरजापुर के किसानों की प्रशंसा की। उन्होंने देश में प्याज और लहसुन पर प्रौद्योगिकी विकास व हस्तांतरण में आइसीएआर-डीओजीआर के प्रयासों की सराहना की। कहा कि भंडारण क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देने की आवश्यकता है। प्याज की कीमतों को स्थिर करना और किसानों की आय दोगुनी करना बड़ी चुनौती है। इसके लिए किसानों काे खरीफ प्याज की व्यवसायिक खेती को बढ़ावा देना होगा।
जेएनकेवीवी जबलपुर के पूर्व कुलपति डाॅ. गौतम कल्लू ने किसानों से आह्वन किया कि वे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें। आइसीएआर-आइआइवीआर पुणे के निदेशक डाॅ. मेजर सिंह ने कहा कि मीरजापुर में खरीफ प्याज की खेती की अपार सम्भावनाएं हैं। कृषकों को प्याज की उन्नत तकनीक को अपनाना होगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश में मीरजापुर खरीफ प्याज उत्पादन के लिए उपयुक्त साबित हो रहा है, जो आने वाले समय में खरीफ प्याज उत्पादन का हब बनेगा। इससे खरीफ प्याज उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ प्याज की मूल्य में स्थिरता भी आएगी। डाॅ. नागेंद्र राय, डाॅ. विजय महाजन, डाॅ. अमरजीत गुप्ता ने भी सम्बोधित किया।
चुनार तहसील क्षेत्र में डीओजीआर द्वारा विकसित तकनीकों को अपनाने से प्याज के उत्पादन और उत्पादकता में उल्लेखनीय रूप से क्रमशः 93 प्रतिशत और 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसमें एग्रीमित्र और जीकेआरडीएफ का सराहनीय सहयोग है। कार्यक्रम की अध्यक्षता महेंद्र प्रताप सिंह ने की। सामाजिक कार्यकर्ता डाॅ. गोविंद नारायण सिंह व डाॅ. अमर जीत गुप्ता को सम्मानित किया गया।



