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दिल्ली हिंसा: उमर खालिद की जमानत याचिका हाई कोर्ट ने खारिज की

नई दिल्ली- 18 अक्टूबर। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली हिंसा के आरोपित उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये फैसला सुनाया। 9 सितंबर को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर अमित प्रसाद ने जामिया कोआर्डिनेशन कमेटी के व्हाट्स ऐप ग्रुप की चैट के बारे में बताया था, जिसमें कहा गया है कि कह दो हम जामिया से हैं, दिल्ली का चक्का जाम करेंगे। दिल्ली पुलिस ने दलील दी थी कि शाहीन बाग का धरना महिलाओं की ओर से किया गया स्वतंत्र आंदोलन नहीं था। धरना और प्रदर्शन स्थल योजनाबद्ध तरीके से मस्जिदों के नजदीक बनाए गए थे। दिल्ली पुलिस की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर अमित प्रसाद ने कहा था कि आरोपितों के व्हाट्स ऐप चैट में कहा गया कि धरना स्थलों पर ज्यादा हिन्दुओं को लाया जाए ताकि वो धर्मनिरपेक्ष दिखे। उन्होंने कहा कि शाहीन बाग का आंदोलन महिलाओं की ओर से किया गया स्वतंत्र आंदोलन नहीं था।

सुनवाई के दौरान उमर खालिद की ओर से कहा गया था कि किसी भी घटना के समय उमर खालिद मौजूद नहीं था और न ही उसके पास से कुछ बरामद किया गया है। उमर खालिद की ओर से कहा गया था कि उसके खिलाफ दाखिल चार्जशीट में साजिश को दिखाने के लिए जिन घटनाओं का जिक्र किया गया है, उनका आपस में कोई संबंध नहीं है। उमर खालिद की ओर से पेश वकील त्रिदिप पेस ने कहा था कि चार्जशीट में पांच व्हाट्स ऐप ग्रुप की चर्चा की गई है, जिसमें उमर खालिद केवल दो ग्रुप का सदस्य था और वो भी एक ही ग्रुप में मैसेज भेजता था। उन्होंने कहा था कि किसी भी चश्मदीद गवाह ने ये नहीं कहा कि उमर खालिद नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा में भागीदार था। पुलिस ने उमर खालिद की गिरफ्तारी से पहले मामला बनाया।

उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट उमर खालिद की ओर से दाखिल जमानत याचिका पर 22 अप्रैल से सुनवाई कर रहा था। 24 मार्च को कड़कड़डूमा कोर्ट ने उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

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