
चुनाव आयोग गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दलों के खिलाफ सख्त
नई दिल्ली- 25 मई। चुनाव आयोग ने पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) के खिलाफ एक मुहिम शुरू की है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आरयूपीपी लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन करें। आयोग का कहना है कि 2100 से अधिक आरयूपीपी के खिलाफ चरणबद्ध कार्रवाई शुरू की जाएगी।
आयोग की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार सितंबर, 2021 तक 2,796 आरयूपीपी हैं। इनमें 2001 के बाद से 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। गंभीर चिंता का विषय यह है कि कि ज्यादातर आरयूपीपी चुनावी प्रक्रिया में भाग नहीं ले रही है और न ही आवश्यकताओं का पालन कर रही है।
आयोग के अनुसार 66 आरयूपीपी ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29सी के तहत वैधानिक आवश्यकताओं का पालन किए बिना वित्त वर्ष 2020 में आईटी छूट का दावा किया है। वहीं 2174 आरयूपीपी ने योगदान रिपोर्ट जमा नहीं की है। ऐसे में उचित वैधानिक अनुपालन के बिना दान प्राप्त करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी। वहीं गंभीर वित्तीय अनियमितता में शामिल बताए गए तीन आरयूपीपी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा चुकी है। साथ ही 87 गैर-मौजूद आरयूपीपी को सूची से हटा दिया जाएगा और प्रतीक आदेश (1968) के तहत लाभ वापस ले लिया जाएगा।
पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की प्रासंगिक धारा 29ए और 29सी के तहत शर्तों और विनियमों का अनुपालन आवश्यक है। इसमें वित्तीय अनुशासन, औचित्य, सार्वजनिक जवाबदेही, पारदर्शिता बनाए रखने और मतदाताओं को सूचित निर्णय लेने के लिए सशक्त बनाने से जुड़े प्रावधान हैं।



