भारत

 एआई में पादर्शिता जरूरी, बने सबके हित और सबके सुख का साधन: PM

नई दिल्ली- 19 फरवरी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को एआई शिखर सम्मेलन में विश्व के समक्ष भारत का सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय का बेंचमार्क प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एआई को कुछ देश और कंपनियां रणनीति के तौर पर इस्तेमाल करने की सोच रही हैं। भारत का मानना है कि एआई के लिए पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट का उद्घाटन किया। उन्होंने इसे विश्व का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक एआई इम्पैक्ट समिट बताया और कहा कि हमें आज यह संकल्प करना चाहिए कि एआई को वैश्विक भलाई ( ग्लोबल कॉम गुड) के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने एआई से जुड़ा ‘मानव’ विजन प्रस्तुत किया। मानव विजन का अर्थ है एम (मोरल एंड एथिकल सिस्टम), ए (अकाउंटेबल गवर्नेंस) एन (नेशनल सॉवरेन्टी) ए (एक्सेसिबल एंड इंक्लूसिव) वी (वैलिड एंड लेजिटीमेट)।

इस कार्यक्रम में फ्रांस गणराज्य के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव, राष्ट्राध्यक्ष, मंत्रीगण, बहुपक्षीय संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि और प्रौद्योगिकी एवं एआई उद्योग के नेता सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उन्होंने कहा कि नैतिक और नीतिपरक प्रणालियां यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता नैतिक दिशा-निर्देशों पर आधारित होनी चाहिए। जवाबदेह शासन का अर्थ है कि इसके लिए पारदर्शी नियम और इसकी सशक्त निगरानी होनी चाहिए। राष्ट्रीय संप्रभुता से मतलब है कि डेटा उसके सही स्वामी (संबंधित देश) का है। सुलभ और समावेशी यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता एकाधिकार नहीं, बल्कि एक गुणक होना चाहिए। वैध और न्यायसंगत से अर्थ है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता विधिव और सत्यापन योग्य होनी चाहिए।

बड़े विजन और जिम्मेदारी को निभाने का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी के साथ ही हमें इस बात की भी चिंता करनी है कि आने वाली पीढ़ियों के हाथों में हम एआई का क्या स्वरूप सौंपकर जाएंगे। उन्होंने कहा कि आज असली प्रश्न भविष्य में एआई क्या कर सकती है के बजाय वर्तमान में हम एआई के साथ क्या करते हैं। हमें एआई को मशीन केन्द्रित से मानव केन्द्रित बनाने और संवेदनशील तथा उत्तरदायी बनाने पर जोर देना चाहिए। यही इस वैश्विक एआई सम्मेलन कामूल उद्देश्य है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया में दो तरह के लोग हैं। एक जिन्हें एआई में भय दिखता है। दूसरे वे जिन्हें एआई में भाग्य दिखता है। मैं गर्व और जिम्मेदारी से कहता हूं कि भारत को भय नहीं, एआई में भाग्य दिखता है, भारत को एआई में भविष्य दिखता है।

प्रधानमंत्री ने वर्तमान में सामने आई एआई चुनौतियों जैसे डीप फेक का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार खाने के सामानों पर उसके अंदर उपयुक्त सामग्री का लेबल किया जाता है। इसी तरह से डिजिटल दुनिया में भी आज के समय में लेबलिंग बहुत जरूरी है। प्रधानमंत्री ने एआई को मानव इतिहास का आज तक का सबसे परिवर्तनकारी नवाचार बताया और कहा कि इसकी तेजी और स्तर अब तक के हुए पिछले सभी नवाचार से कहीं ज्यादा है। ऐसे में इसके विनाशकारी प्रभाव भी हो सकते हैं जिससे बचना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि एआई को खुली छूट दी जानी चाहिए लेकिन जीपीएस की तरह कमान हमारे हाथों में होनी चाहिए; मैं एआई शिखर सम्मेलन में मानव विजन प्रस्तुत कर रहा हूं; एआई विभिन्न प्रकार के रोजगार सृजित करेगा। ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें एआई को लोकतांत्रिक करने और इसे समावेशी और सशक्त बनाने का माध्यम बनाने पर जोर देना चाहिए । उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लोकतंत्रीकरण होना चाहिएष। मनुष्यों को केवल डेटा बनाकर नहीं छोड़ा जा सकता। इसे समावेशन और सशक्तिकरण का माध्यम बनना होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के एआई को समावेशी और लोकतांत्रिक बनाने के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण से लेकर क्वांटम कंप्यूटिंग तक एक मजबूत इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षित डेटा सेंटर, एक मजबूत आईटी ढांचा और एक गतिशील स्टार्टअप इकोसिस्टम भारत को किफायती, स्केलेबल और सुरक्षित एआई समाधानों का एक स्वाभाविक केंद्र बनाते हैं। मोदी ने इस बात पर बल दिया कि भारत में विविधता, जनसांख्यिकी और लोकतंत्र मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारत में सफल होने वाला कोई भी एआई मॉडल वैश्विक स्तर पर लागू किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास प्रतिभा, ऊर्जा क्षमता और नीतिगत स्पष्टता है। भारत मानवता के छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। साथ ही भारत विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी, सबसे बड़े तकनीकी प्रतिभा भंडार और एक समृद्ध प्रौद्योगिकी-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र का घर है। उन्होंने कहा कि 14 करोड़ भारतीय नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए उत्सुक है। भारत में इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना न केवल देश के लिए बल्कि पूरे वैश्विक दक्षिण के लिए भी गर्व की बात है।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन में 3 भारतीय कंपनियों ने अपने एआई मॉडल्स और एप्स लॉन्च किए हैं। ये मॉडल्स हमारे युवा के प्रतिभा को दिखाते हैं और भारत के समाधान और उसकी गहराई तथा विविधता का भी प्रतिबिंब हैं। प्रधानमंत्री ने एआई शिखर सम्मेलन की प्रदर्शनी को लेकर व्याप्त उत्साह, विशेषकर युवा प्रतिभाओं की व्यापक भागीदारी की सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि, सुरक्षा, दिव्यांगजनों की सहायता और बहुभाषी आबादी की जरूरतों को पूरा करने जैसे क्षेत्रों में प्रस्तुत समाधान ‘मेड इन इंडिया’ की ताकत को दर्शाते हैं और एआई क्षेत्र में भारत की नवोन्मेषी क्षमताओं को प्रदर्शित करते हैं।

उन्होंने कहा कि नई तकनीकों को अक्सर शुरुआत में संदेह का सामना करना पड़ता है, लेकिन जिस गति और विश्वास के साथ दुनिया भर के युवा एआई को स्वीकार कर रहे हैं, उस पर अपना अधिकार जमा रहे हैं और उसका उपयोग कर रहे हैं, वह अभूतपूर्व है। बच्चों की सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार स्कूलों के पाठ्यक्रम तैयार किए जाते हैं, उसी प्रकार एआई क्षेत्र भी बच्चों के लिए सुरक्षित और परिवार के मार्गदर्शन में होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का विषय है सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय, यानी सभी का कल्याण, सभी की खुशी। इसका उद्देश्य भारत को एआई के क्षेत्र में अग्रणी के रूप में स्थापित करना और एक ऐसे भविष्य की कल्पना करना है जहां एआई मानवता को आगे बढ़ाए, समावेशी विकास को बढ़ावा दे और हमारे साझा ग्रह की रक्षा करे।

इस समिट में सीईओ-सीएक्सओ सहित 500 से अधिक वैश्विक एआई लीडर, लगभग 100 सीईओ और संस्थापक, 150 शिक्षाविद और शोधकर्ता, और 400 सीटीओ, वीपी और परोपकारी लोग एक साथ आएंगे। इसमें 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि भी शामिल होंगे, जिनमें 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख और लगभग 60 मंत्री और उप मंत्री शामिल हैं।

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