
अररिया के नरपतगंज के लुट मामले में 30.67 लाख बरामद, 7 गिरफ्तारी
अररिया- 25 दिसम्बर। अररिया के नरपतगंज थाना क्षेत्र में 15 दिसंबर को दिनदहाड़े दोपहर सवा एक बजे हरिओम ट्रेडर्स के मैनेजर प्रशांत बनर्जी से हुए 40 लाख रुपए लूट कांड मामले में पुलिस ने अबतक सात आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए 30 लाख 67 हजार 500 रुपए बरामद किये हैं। घटना के उद्भेदन को लेकर फारबिसगंज एसडीपीओ शुभांक मिश्रा के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने पूर्व में 5 आरोपियों की गिरफ्तारी करने के बाद अनुसंधान के क्रम में दो अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की। मामले में एसआईटी ने पहले 23 लाख 92 हजार 500 रुपैये बरामद किये थे।
अनुसंधान के क्रम में ही पुलिस ने फारबिसगंज गोढ़ीहारे चौक वार्ड संख्या 18 के रॉकी साह पिता-सुमन साह और रिफ्यूजी कॉलोनी के रहने वाले साजन सिंह चौहान उर्फ भोला चौहान पिता-गणेश चौहान को गिरफ्तार किया।रॉकी साह के पास से पुलिस ने लूट के 2 लाख 75 हजार रुपैये के साथ लूटा गया एंड्राइड मोबाइल और घटना में उपयोग में लाये गये मोटरसाइकिल बरामद किया गया।वहीं पुलिस रिमांड पर लिया गया आरोपी फारबिसगंज भागकोहलिया के रहने वाले पूर्व में गिरफ्तार विक्की कुमार पिता-रंजीत भगत के बयान एवं निशानदेही के आधार पर उनके घर में बालू के अंदर छुपा कर रखे चार लाख रुपैये बरामद किए। अपने कार्यालय कक्ष में अररिया एसपी अशोक कुमार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह जानकारी दी।
रॉकी साह और साजन सिंह चौहान उर्फ भोला चौहान से पहले गठित एसआईटी टीम ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था और उनके पास से लूट के 23 लाख 92 हजार 500 रुपैये बरामद किये गये थे।पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों में फारबिसगंज रिफ्यूजी कॉलोनी के गाड़ी चालक संजय कुमार चौहान पिता-स्व.सभापति चौहान,गणेश राम पिता-फुलचंदन राम,फारबिसगंज मझुआ के राज सिंह राजपूत उर्फ राजा पिता-धर्मनाथ सिंह,भागकोहलिया निवासी विक्की कुमार पिता-रंजीत भगत और गोपालपुर मझुआ निवासी ललन रजक पिता-विनोद रजक को गिरफ्तार किया था।घटना में मुख्य रूप से मैनेजर के गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर संजय कुमार चौहान की लूटकांड में शामिल होने की बात सामने आई थी।
उल्लेखनीय है कि घटना के बाद अररिया एसपी अशोक कुमार सिंह ने मामले के उद्भेदन को लेकर फारबिसगंज एसडीपीओ शुभांक मिश्रा की अगुवाई में एसआईटी का गठन किया।जिसमें फारबिसगंज, नरपतगंज, रानीगंज,जोकीहाट,सिमराहा थानाध्यक्ष समेत नरपतगंज थाना में पदस्थापित दो एसआई को शामिल किया गया। एसआईटी के गठन के साथ ही पूरी टीम वैज्ञानिक एवं तकनीकी अनुसंधान का सहारा लेते हुए मामले के अनुसंधान में लगी रही।



