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यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों के दाखिले पर छह हफ्ते में निर्णय ले केंद्र सरकार

नई दिल्ली- 25 जनवरी। यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों के दाखिले की मांग पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि सरकार ने इस मामले में एक कमेटी का गठन किया है। कमेटी को छात्रों पर फैसला लेने में कुछ समय लगेगा। उसके बाद जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र से कहा कि वो छह हफ्ते में निर्णय ले।

सुनवाई के दौरान छात्रों की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह छात्रों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है, कम से कम पहले और दूसरे साल के छात्रों पर फैसला लेना चाहिए। दिसंबर 2022 में कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि इस मसले पर विशेषज्ञों की कमेटी गठित करे जो छात्रों की समस्याओं का समाधान कर सके। कोर्ट ने कहा था कि ये जब देश में डॉक्टरों की जरुरत है वैसी परिस्थिति में ये छात्र राष्ट्रीय संसाधन हो सकते हैं।

कोर्ट ने यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों का दूसरे देशों में दाखिला आसान करने के लिए 16 सितंबर 2022 को केंद्र सरकार को पोर्टल बनाने का सुझाव दिया था। इसके पहले केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा था कि ये छात्र या तो नीट में कम अंक के चलते वहां गए थे, या सस्ती पढ़ाई के लिए। इन छात्रों का भारत मे दाखिला कानूनन संभव नहीं है। केंद्र सरकार ने कहा था कि यूक्रेन के कॉलेज से सहमति ले दूसरे देश में डिग्री पूरी करें।

सुनवाई के दौरान 5 सितंबर 2022 को केंद्र सरकार के लिए पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि विदेश मंत्रालय यह विषय देख रहा है। हो सकता है कि छात्रों के लिए कुछ सकारात्मक कदम उठाया जाए। 26 अगस्त को कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह सरकार को तय करना है कि क्या भारत के कॉलेजों में इतनी जगह है और क्या नियमों के तहत इन्हें भारत में दाखिला दिया जा सकता है।

पार्थवी आहूजा और प्राप्ति सिंह ने दायर याचिका में कहा है कि यूक्रेन में स्थिति सामान्य होने की अभी कोई संभावना नहीं है। हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। याचिका में कहा गया है कि यूक्रेन से लौटे छात्रों को प्रवेश नियमों में छूट देकर सरकारी और निजी कॉलेजों में जगह दी जाए। याचिका में कहा गया है कि यूक्रेन से लौटे छात्रों की पढ़ाई पूरी करने के लिए वहां के कॉलेज और यूनिवर्सिटी से समन्वय कर उन्हें भारत में अपनी पढ़ाई पूरी करने का दिशा-निर्देश जारी किया जाए।

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Author: lakshyatak

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