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 समुद्री अपराध रोकने को भारत और इंडोनेशिया की नौसेनाओं ने शुरू की गश्त

नई दिल्ली- 11 दिसंबर। भारत और इंडोनेशिया की नौसेनाएं इस समय समुद्र के जरिए होने वाले अवैध व्यापार को रोकने के लिए संयुक्त रूप से गश्त कर रही हैं। यह 39वां मौका है, जब भारत-इंडोनेशिया समन्वित गश्त की जा रही है। यह दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग बढ़ाने और भारत-इंडोनेशिया के बीच दोस्ती के बंधन को और मजबूत करने का प्रयास है।

भारत और इंडोनेशिया की नौसेनाओं ने 08 दिसंबर से संयुक्त गश्त शुरू की थी, जो 19 दिसंबर तक चलेगी। भारत और इंडोनेशिया के बीच पारंपरिक रूप से करीबी और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं, जिसमें गतिविधियों और बातचीत का एक व्यापक स्पेक्ट्रम शामिल है। समुद्री गश्त शुरू होने से पहले भारतीय नौसेना के स्वदेश निर्मित मिसाइल कार्वेट आईएनएस करमुक ने इंडोनेशिया के बेलावन में हुई ब्रीफिंग में भाग लिया। दोनों नौसेनाएं 15-16 दिसंबर को सिर्फ अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा के साथ गश्त करेंगी, जिसका समापन पोर्ट ब्लेयर में एक डीब्रीफ के साथ होगा।

समुद्री गश्त में भारत का प्रतिनिधित्व आईएनएस करमुक के साथ स्वदेशी निर्मित लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी वेसल एल-58 और डोर्नियर मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट करेंगे। इसी तरह केआरआई कट न्याक दीन और कपितन पट्टिमुरा क्लास कार्वेट इंडोनेशियाई पक्ष का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस समुद्री गश्त का मकसद दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी समझ बढ़ाने के साथ ही समुद्र के जरिये होने वाले अवैध व्यापार को रोकना है। इसके अलावा मादक पदार्थों की तस्करी, समुद्री आतंकवाद और सशस्त्र समुद्री डकैती रोकने के उपाय तलाशना है।

भारत सरकार के दृष्टिकोण सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के हिस्से के रूप में भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) के देशों के साथ सक्रिय रूप से संलग्न रही है। भारत और इंडोनेशिया 2002 से साल में दो बार वाणिज्यिक नौवहन, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैध समुद्री गतिविधियों के संचालन के लिए आईओआर के इस महत्वपूर्ण हिस्से को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से समुद्री गश्त कर रहे हैं। इससे आगे चलकर तस्करी, अवैध अप्रवासन की रोकथाम और समुद्र में खोज एवं बचाव (एसएआर) संचालन के लिए सूचना के आदान-प्रदान से परिचालन तालमेल को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

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Author: lakshyatak

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