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 ‘आप’ में शामिल होने के घंटों बाद कांग्रेस में वापस लौटे 2 पार्षद

नई दिल्ली- 10 दिसंबर। दो नवनिर्वाचित कांग्रेस पार्षद और पार्टी नेता अली मेहंदी आम आदमी पार्टी (आप) में शामिल होने के घंटों बाद देर रात पुरानी पार्टी में वापस लौट आये। बाद में उन्होंने माफीनामा भी जारी किया।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए मेहंदी ने कहा कि उन्होंने आप में शामिल होकर गलती की। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस और राहुल गांधी के ‘वफादार कार्यकर्ता’ हैं।

कांग्रेस की नवनिर्वाचित पार्षद सबीला बेगम और नाजिया खातून और प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष अली मेहंदी शुक्रवार को आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। ‘आप’ नेता दुर्गेश पाठक की मौजूदगी में उक्त कांग्रेस नेता आप में शामिल हुए थे। शुक्रवार रात मुस्तफाबाद में आम लोगों ने इसका जमकर विरोध किया। इन कांग्रेस नेताओं के पुतले जलाए और रात तक सड़कों पर उतर प्रदर्शन करते रहे।

उत्तर पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद विधानसभा अंतर्गत आने वाले बृजपुरी वार्ड 245 से कांग्रेस की टिकट पर जीत दर्ज करने वाली नाजिया और मुस्तफाबाद वार्ड 243 से सबीला बेगम ने आम आदमी पार्टी के नगर निगम प्रभारी दुर्गेश पाठक की मौजूदगी में आम आदमी पार्टी का दामन थामा था, जिससे लोग खासे नाराज थे।

इन कांग्रेस नेताओं का घर से निकलना मुश्किल हो गया, विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी को वोट दिया था, ऐसे में नवनिर्वाचित पार्षदों का पार्टी बदलना मतदाताओं के साथ धोखा है। जिसके बाद देर रात प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष अली मेहंदी देर रात वापिस कांग्रेस में लौट आए। उनके साथ आप में शामिल हुए दो पार्षदों के बारे में भी उन्होंने कहा कि उनसे गलती हुई, वे कांग्रेस में ही रहेंगे। इस संबंध में उन्होंने वीडियो संदेश भी जारी किया।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली नगर निगम चुनाव में 2022 में मुस्लिम बहुल इलाके में रहने वाले मतदाताओं ने आम आदमी पार्टी के बजाय कांग्रेस पर भरोसा जताते हुए एक तरफा वोट किया था। कांग्रेस पार्षदों के आप में शामिल होने पर बवाल के बाद इस मामले पर कांग्रेस नेता अजय माकन ने ट्वीट किया था।

उन्होंने लिखा था कि अली भाई आपसे यह उम्मीद नहीं थी। आपके किस रूप को असली समझें? ‘आप’ के दफ्तर की, या इस जलसे की, जहां आप के खिलाफ बोल कर चुनाव जीता ? राजनीति में उतार चढ़ाव आते-जाते हैं। हमेशा पार्टी में हमारी इच्छा पूरी नहीं होती,पर पार्टी और विचारधारा सर्वोपरी है। ऐसा क्यों करा? समझ से परे है।

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Author: lakshyatak

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