आईपीएस किशन सहाय जी से जानिए क्या होता है “वैज्ञानिक दृष्टिकोण” ?

7 अगस्त : बहुत से लोग वैज्ञानिक दृष्टिकोण को नास्तिकता का पर्यायवाची समझते हैं लेकिन इनमें काफी अंतर है।आस्तिकता से सामान्य आशय है कि ईश्वरीय या दैवीय शक्ति के अस्तित्व में विश्वास करना तथा यह मानना कि सृष्टि व ब्रह्माण्ड ईश्वरीय शक्ति जैसे भगवान/अल्लाह/गॉड/यहोवा द्वारा बनाए गए हैं तथा नास्तिकता से सामान्य आशय है कि ईश्वरीय या दैवीय शक्ति के अस्तित्व में विश्वास नहीं करना तथा सृष्टि व ब्रह्माण्ड स्वतः निर्मित हैं।

भारत में जैन,बौद्ध और चार्वाक आदि नास्तिक दर्शन प्राचीन काल से ही प्रचलित हैं परन्तु विज्ञान-तकनीकी में उनका भी कोई खास योगदान नहीं है।आस्तिक और नास्तिक,दोनों ही दृष्टिकोणों का आशय जिज्ञासु प्रवृत्ति से नहीं है।आस्तिकता में प्रकृति के रचनाकर्ता यानि ईश्वर की स्तुति की जाती है तथा प्राकृतिक घटनाओं को ईश्वर/अल्लाह/गॉड/यहोवा जनित माना जाता है।नास्तिकता में प्राकृतिक घटनाओं को स्वतः जनित माना जाता है तथा प्रकृति के रहस्यों को खोजने में समय खराब करने को नास्तिक निरर्थक मानते हैं और जीवन को ख़ुशी से जीने को ज्यादा तवज्जो दी जाती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आशय है जिज्ञासु प्रवृत्ति का होना व घटनाओं और प्रकृति के रहस्यों को जानने की सोच रखना,इसमें प्राकृतिक घटनाओं के कारणों की खोज की जाती है।आस्तिक लोगों के बजाय नास्तिक लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपेक्षाकृत आसानी से पनप सकता है क्योंकि आस्तिक लोग यह समझते हैं कि उनके धर्मग्रंथों में पहले से ही सब खोज रखा है इसलिए उनके दिमाग में नई चीजों के लिए स्थान खाली नहीं रहता है जबकि नास्तिक दिमाग कोरे कागज की तरह होता है।

विज्ञान-तकनीकी के विकास के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण जिम्मेदार है न कि नास्तिकता।अंधविश्वास मुक्तता के मामले में नास्तिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण एक साथ है।नास्तिकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण में क्रमशः उतना ही फर्क है,जितना एक मकान की सीढ़ियों के पास खड़े होना और मकान की छत पर होना।

आइए,विज्ञान-तकनीकी के तीव्र विकास व समानता के आधार पर शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के लिए अंधविश्वास मुक्त,वैज्ञानिक दृष्टिकोण युक्त,परम्परागत धर्म विहीन,जातिविहीन,नस्लभेद मुक्त,साहसी,शिक्षित,स्वस्थ और उच्च नैतिक मूल्यों वाले,”मानवतावादी विश्व समाज”के निर्माण को अपना प्रमुख लक्ष्य बनाएँ।
स्पेशल रिपोर्ट राष्ट्रभक्त दैनिक शोषित समाचार

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Author: lakshyatak

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