राजस्थान वित्त निगम ने मान इण्डस्टि्रयल कापोरेशन लि. के विरुद्ध वसूली की कार्यवाही की शुरु

7 अगस्त : जयपुर, 6 जुलाई। राजस्थान वित्त निगम द्वारा मान इण्डस्टि्रयल कापोरेशन लि. के विरुद्ध 46 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूली के लिए ‘दिवाला और शोधन अक्षमता सहिता 2016‘ के तहत नेशनल कम्पनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) जयपुर में प्रार्थना पत्र दायर किया है।
राजस्थान वित्त निगम के प्रबंध निदेशक श्री शक्ति सिंह राठौड़ ने बताया कि राजस्थान वित्त निगम द्वारा मान इण्डस्टि्रयल कापोरेशन लि. को वर्ष 1962 में 10 लाख एवं वर्ष 1966 में 12 लाख 72 हजार रूपये ऋण स्वीकृत किया गया था। जिसकी एवज में ऋणी कम्पनी द्वारा जयपुर रेलवे स्टेशन के पास 50 एकड़ जमीन निगम के पास गिरवी रखी गई थी। उन्होंने बताया कि ऋण राशि में से 14 लाख 66 हजार रूपये कम्पनी को ट्रांसमिशन टावर के निर्माण हेतु इकाई स्थापित करने के लिए वितरित किये गये थे। कम्पनी ऋण की राशि व ब्याज की किश्तों का भुगतान करने में विफल रही है। निगम द्वारा कम्पनी के विरूद्ध कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।
श्री राठौड़ ने बताया कि अतिरिक्त जिला न्यायालय जयपुर द्वारा एक समझौता डिक्री के तहत कम्पनी को 12 लाख 9 हजार रूपये का भुगतान ब्याज सहित करना था। लेकिन कम्पनी द्वारा भुगतान नहीं किया गया। वित्त निगम ने डिक्री राशि ब्याज सहित वसूलने के लिए 38 लाख 85 हजार रूपये मय ब्याज के लिए प्रार्थना पत्र 5 फरवरी, 1987 को न्यायालय में दायर किया था। लेकिन डिफॉल्टर ऋणी कम्पनी ने राशि चुकाने की बजाय निगम के विरूद्ध विभिन्न न्यायिक प्रकरण दायर कर अनावश्यक रूप से मामले को लम्बा किया गया।
प्रबंध निदेशक ने बताया कि न्यायालय द्वारा पारित समझौता डिक्री 22 सितम्बर, 1977 के अनुसार डिफॉल्टर ऋणी कम्पनी पर 46 करोड़ 27 लाख 34 हजार 325 रूपये बकाया चल रहें है। उन्होंने बताया कि राजस्थान वित्त निगम द्वारा पुराने बकायादारों के विरूद्ध वसूली के लिए विशेष नियम अभियान चलाया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान वित्त निगम राज्य सरकार का एक उपक्रम है, जिसमें सिडबी, भारतीय जीवन बीमा निगम, पंजाब नेशनल बैंक आदि संस्थाएं भी अंशधारक हैं और यह वित्त निगम वर्ष 1955 से राज्य के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र में औद्योगिकीकरण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है।
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Author: lakshyatak

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