कोविड-19 टीकाकरण- मिथक बनाम तथ्य

31 जुलाई : भारत के राष्ट्रीय कोविड टीकाकरण कार्यक्रम को वैज्ञानिक और महामारी विज्ञान के साक्ष्यों, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशानिर्देशों और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के आधार पर बनाया गया है। यह व्यवस्थित एक छोर से दूसरे छोर (एंड-टू-एंड) तक की योजना में शामिल है और इसे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों एवं लोगों की बड़े पैमाने पर प्रभावी और कुशल भागीदारी के माध्यम से लागू किया जाता है।

भारत सरकार की टीकाकरण कार्यक्रम के प्रति प्रतिबद्धता शुरू से ही सक्रिय और स्थिर रही है और वह टीकाकरण की गति के साथ-साथ अपने टीकाकरण कवरेज और बढ़ाने के लिए राज्यों का लगातार समर्थन भी कर रही है। देशव्यापी सीओवीआईयूडी19 टीकाकरण अभियान के सार्वभौमिकरण के नए चरण के अंतर्गत केंद्र सरकार सभी वयस्क आबादी के टीकाकरण के लिए राज्यों को 75% कोविड टीके मुफ्त (नि:शुल्क) प्रदान कर रही है।

अभी हाल में ही सामने आई कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उत्तर प्रदेश और बिहार में कोविड-19 टीकाकरण अभियान की गति धीमी होने के आरोप लगाए गए हैं और यह कहा गया है कि दोनों राज्यों को अपनी आबादी का पूरी तरह से टीकाकरण करने में तीन साल लगेंगे।

इस संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि ऐसी समाचार रिपोर्टें गलत और भ्रामक हैं क्योंकि इनमें टीकाकरण की दर को कम दिखाने के लिए पहले तो कोविड टीकाकरण अभियान की शुरुआत वाली औसत दैनिक टीकाकरण दर का उपयोग किया गया है और फिर इस संख्या का उपयोग यह दावा करने के लिए किया गया है कि इस हिसाब से इन राज्यों को अपने नागरिकों के लिए टीकाकरण अभियान को पूरा करने में कई साल लग जाएंगे।

इसके अलावा एक ऐसी औसत का उपयोग करना जो दुनिया भर में (भारत सहित) टीकों की अत्यधिक कम उपलब्धता के दौरान रहा था और फिर बाद में अब जब टीके की आपूर्ति बहुत अधिक होने की उम्मीद हो चली है तब वर्तमान आंकड़ों के साथ इसकी तुलना करके कम दर को अपने अनुमान के हिसाब से दिखाने (एक्सट्रपलेशन करना) से टीके के बारे में झिझक पैदा कर सकता है जो कि टीकाकरण के दौरान एक वैश्विक मुद्दा भी है।

इसके विपरीत देश भर में वैक्सीन की उपलब्धता और टीकाकरण दर में लगातार सुधार हो रहा है। साथ ही यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि उत्तर प्रदेश जनसंख्या की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य है तथा 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की जनसंख्या 19.95 करोड़ से अधिक है। उत्तर प्रदेश की जनसंख्या ब्राजील, रूस, पाकिस्तान, बांग्लादेश सहित कई देशों से अधिक है।

अपने बड़े आकार और बड़ी संख्या में ग्रामीण आबादी के बावजूद राज्य अपने सभी पात्र नागरिकों को जल्द से जल्द मुफ्त टीकाकरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य ने इस दिशा में सक्रिय रूप से काम किया है और जो हर माह राज्य के बढ़ रही टीकाकरण के कवरेज से दिखाई भी दे रहा है। राज्य के अपनी मासिक वैक्सीन कवरेज में लगातार सुधार हो रहा है, जो जनवरी में हुए केवल 4.63 लाख टीकाकरण से बढ़कर जुलाई के महीने में 1.54 करोड़ से अधिक हो गया है। टीकाकरण कवरेज के मामले में भी उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में बना हुआ है।

यह रुझान स्पष्ट रूप से राज्य की टीकाकरण कवरेज में सुधार को दर्शाता है, जो हर महीने बहुत तेज गति से हो रहा है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने नागरिकों की अधिकतम संख्या तक पहुंचने और उन्हें दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान में शामिल होने में मदद करने के लिए कई अनूठे कदम भी उठाए हैं।

अपनी टीकाकरण कवरेज को आगे बढाते हुए टीकाकरण के लिए राज्य द्वारा अपनाए गए ‘क्लस्टर दृष्टिकोण’ के साथ ही राज्य की महिलाओं को कोविड-19 वैक्सीन का एक टीका लगवाने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए विशेष ‘गुलाबी बूथ’ बनाने के भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश ने कई कार्यस्थलों पर भी सक्रिय रूप से टीकाकरण के सत्र आयोजित किए हैं और कमजोर जनसंख्या समूह जैसे रेहड़ी-पटरी वाले, सब्जी विक्रेताओं, ट्रांसपोर्टरों और मीडियाकर्मियों तक इस अभियान को पहुंचाया है। इन सभी प्रयासों ने आज 30 जुलाई 2021 तक उत्तर प्रदेश के 4.67 करोड़ के उच्च टीकाकरण की कवरेज में अपना योगदान दिया है।

बिहार में भी टीकाकरण का दायरा लगातार बढ़ रहा है। बिहार की मासिक टीकाकरण कवरेज को निम्न प्रकार से देखा जा सकता है :

इसके अलावा, यह भी बताया जाना चाहिए कि टीका एक जैविक उत्पाद है और जिसके निर्माण की प्रक्रिया में समय लगता है। एक बार इसका उत्पादन होने के बाद इनकी गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए टीकों का परीक्षण भी किया जाता है। इस प्रकार टीके के उत्पादन के लिए निर्माण करना एक ऐसी लंबी प्रक्रिया है जिसे तत्काल आपूर्ति करने की प्रक्रिया में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है।

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Author: lakshyatak

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